-एडीजी सिंघल ने कहा, छात्रा व शिक्षिका की सुरक्षा में भीड़ ने अपराधियों पर किया हमला.

श्चड्डह्लठ्ठड्ड@द्बठ्ठद्ग3ह्ल.ष्श्र.द्बठ्ठ

क्कन्ञ्जहृन्: राज्य पुलिस मुख्यालय ने बेगूसराय में उग्र भीड़ द्वारा तीन अपराधियों की पीट-पीटकर की गई हत्या को 'मॉब लिंचिंग' मानने से इनकार किया है. राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) एसके सिंघल ने कहा कि यह घटना 'मॉब लिंचिंग' की नहीं बल्कि 'सेल्फ डिफेंस' है. सिंघल ने कहा कि तीन अपराधियों ने स्कूल में घुसकर एक शिक्षिका और एक छात्रा को पिस्टल के बल पर कब्जे में लेने की कोशिश की तो दोनों ने शोर मचाना शुरू किया. जिसे सुनकर आसपास के ग्रामीण जमा हो गए और अपराधियों पर हमला कर दिया. सिंघल ने यह भी कहा कि हमारा कानून आत्मरक्षा की इजाजत देता है. जब कोई अपराधी पिस्टल के बल पर किसी अपराध को अंजाम देने जा रहा हो, तो किसी भी सूरत में मासूम नहीं है. उन्होंने कहा कि 'मॉब लिंचिंग' और आत्मरक्षा में हमला करना दोनों अलग-अलग मामले हैं. मॉब लिंचिंग में किसी बेगुनाह को निशाना बनाया जाता है. भीड़ के हाथों मरने वाले तीनों अपराधी किसी भी सूरत में बेगुनाह नहीं थे. सिंघल ने यह भी कहा कि हमारा कानून हमें आत्मरक्षा के लिए किसी अपराधी पर हमले की इजाजत देता है. आइपीसी की धारा 96 से लेकर 106 तक में इसका विस्तृत वर्णन किया है. यह पूछे जाने पर कि जब मॉब लिंचिंग नहीं थी तब छौड़ाही थानाध्यक्ष को क्यों निलंबित किया गया. सिंघल बोले, इसका जवाब बेगूसराय के एसपी दे सकते हैं. ज्ञात हो कि शुक्रवार को बेगूसराय में लोगों ने 3 अपराधियों को मार डाला था.