बजट के बाद भी नहीं मिल पा रही लोगों को सहूलियत

विभाग को नहीं मिला काउंसलर, अटकी योजना

Meerut. जिला अस्पताल में तंबाकू छुड़वाने के लिए नेशनल टोबेको कंट्रोल प्रोग्राम के तहत शुरू होने वाली ओपीडी स्वास्थ्य विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दी है. 6 महीने बीतने के बाद भी इस ओपीडी के चालू होने की कोई संभावना विभाग नहीं जता रहा है. विभाग का कहना है कि इस केंद्र को चलाने के लिए काउंसलर की जरूरत होती है लेकिन हमारे पास काउंसलर नहीं हैं. ऐसे में फिलहाल ओपीडी शुरू करना मुश्ि1कल है.

ये मिलनी थी सुविधाएं

सिगरेट व तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों की काउंसलिंग कर उन्हें ऐसे पदार्थो का सेवन न करने के लिए मोटिवेट करना.

नशे से होने वाले शारीरिक, सामाजिक और मानसिक नुकसानों के प्रति लोगों को अवेयर करना.

मरीज के फेफड़ों की कार्यक्षमता को नापने के लिए कार्बन-मोनो-ऑक्साइड डिटेक्टर व स्पिरोमेट्री मशीन से जांच की सुविधा.

जिस मरीज में नशे की लत अधिक हो उसे निकोटिन गम और पैच दिया जाना था.

सर्वे में मिले लाखों लोग

स्वास्थ्य विभाग की ओर से तंबाकू छुड़ाने के लिए मुहिम चलाई गई थी.

सर्वे में अकेले मेरठ में ही तंबाकू का सेवन करने वाले 4 लाख लोग चिंहित किए गए थे.

साथ ही केंद्र को खोलने के लिए विभाग को 2 लाख रुपये का बजट भी जारी किया गया है.

लेकिन तंबाकू छोड़ने के लिए लोगों को अवेयर करने वाला स्वास्थ्य विभाग अब अपनी ही मुहिम में पिछड़ रहा है.

मेल सर्जिकल वार्ड के एक रूम में यह ओपीडी शुरू होनी थी. हमसे जगह मांगी गई थी, वह हमने दे दी है.

डॉ. पीके बंसल, एसआईसी, िजला अस्पताल

जिला अस्पताल में ओपीडी खोलने के लिए अभी हमारे पास डॉक्टर्स और काउंसलर नहीं हैं. इनकी नियुक्ति के बाद ही इसे शुरु किया जा सकता है.

डा. राजकुमार, सीएमअो, मेरठ.

बहुत से लोग तम्बाकू का नशा छोड़ना चाहते हैं लेकिन फ्री सर्विस न मिलने की वजह से वह कदम आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं.

पंकज

सिगरेट व तम्बाकू की वजह से लोगों में कई तरह की परेशानी हो जाती है. सरकारी योजनाएं शुरु नहीं होती जिसकी वजह से लोगों को मोटिवेशन नहीं मिल पाता है.

कल्पना पांडे