BAREILLY: सेवा में..सीएम साहब बरेली की जनता को बहरा होने से बचाइए. रेल की इंजन की भांति कार और बाइक में लगे प्रेशर हॉर्न जीने नहीं देते हैं. पिछली बार बरेली आगमन पर आपने कहा था ध्वनि प्रदूषण रोकना भी स्वच्छता का एक अंग है. फिर भी अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया. इस संबंध में मैं निरंतर आपको पत्र लिखता आ रहा हूं. आपने कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं. फिर भी..जी हां, यह वक्तव्य सुभाषनगर के सीनियर सिटीजन मनमोहन मेहरोत्रा के हैं, जो वाहनों में लगे पे्रशर हॉर्न के शोर-शराबे से इतने तंग आ गए हैं कि सीएम के नाम आखिरी पत्र लिखने की तैयारी में है.

सीएम कार्यालय ने दिए कार्रवाई के निर्देश

65 वर्षीय मनमोहन मेहरोत्रा की सुभाषनगर में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान है. वह हार्ट के पेशेंट भी है. दुकान पर बैठे रहने के दौरान अक्सर वहां से बाइक सवार प्रेशन हॉर्न बजाते हुए गुजरते हैं. वहां के अन्य दुकानदारों की भी सुनने की क्षमता क्षीण हो गई है. प्रेशर हॉर्न से टॉर्चर होकर मनमोहन पिछले ढाई वर्ष से सीएम, कमिश्नर और डीएम को पत्र लिख रहे हैं. ताकि, वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाए घूम रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. एक बार फिर सीएम कार्यालय विशेष सचिव नितीश कुमार ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. 25 जनवरी 2018 तक शिकायत का निस्तारण कर सूचित करने को कहा है.

25 तक कार्रवाई कर मांगा जवाब

मनमोहन ने बताया कि सीएम कार्यालय से 25 जनवरी तक कार्रवाई करने के निर्देश आए हैं. यदि, इस बार भी प्रशासन वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगा कर शोर मचा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो वह सीएम साहब को बड़ी निराशा के साथ आखिरी पत्र लिखने के लिए मजबूर होंगे. सैकड़ों लोगों के सिग्नेचर के साथ वह सीएम को आखिरी पत्र लिखेंगे. मनमोहन ने इसके लिए लोगों को मोटिवेट करना शुरू भी कर दिया है. अब तक 40 से अधिक लोगों के नाम, मोबाइल नम्बर और एड्रेस जुटा ि1लए हैं.

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के लिए लेटर तैयार

ध्वनि प्रदूषण फैला रहे लोगों पर रोक लगाने के लिए मनमोहन ने हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन के नाम भी लेटर लिखा है. हालांकि, इसे पोस्ट नहीं किया है. लेटर पोस्ट करने से पहले ही सीएम कार्यालय से कार्रवाई करने के निर्देश आ गए है. लिहाजा, मनमोहन ने लेटर पोस्ट करना उचित नहीं समझा., हालांकि, 25 जनवरी तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर वह हाईकोर्ट के नाम लिख कर रखे लेटर को पोस्ट करेंगे.

प्रेशर हॅर्न से समस्याएं

प्रेशर वाला हॉर्न मतलब मन-मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ना स्वभाविक है. डॉक्टर्स का मानना है कि यदि व्यक्ति के कान देर तक शोर -शराबा फेस करते हैं तो व्यक्ति की आई क्यू क्षमता प्रभावित होती है. शून्य से बीस डेसीबल ध्वनि सामान्य होती है. लेकिन मौजूदा समय में एक व्यक्ति 40-60 डेसीबल ध्वनि फेस करने की क्षमता रखता है. इससे अधिक डेसीबल शोर में रहने पर सडन लॉस की शिकायत शुरू हो जाती है. इसमें शाम के समय तो लोगों को सुनाई तो देता है, लेकिन सुबह के समय सुनने की शक्ति शून्य हो जाती है. इसके अलावा टिनाइटस, ब्लड प्रेशर, विहैबियर चेंजेज सहित अन्य समस्याएं शुरू हो जाती है.

सावधानी है जरूरी

- प्रेशर हार्न न लगाएं.

- बेवजह हार्न का यूज न करें.

- वाहनों की गति सीमा निर्धारित करना.

- रेड सिग्नल होने पर गाड़ी बंद कर दें.

- हियरिंग का प्रॉपर चेकअप कराते रहें.

दिन में ध्वनि का मानक

एरिया - डेसीबल

कॉमर्शियल - 65

रेजिडेंशियल - 55

साइलेंट - 50

इंडस्ट्रियल - 75

(80 से 90 डेसीबल तक शहर में एवरेज ध्वनि प्रदूषण)

सीएम और प्रशासनिक अधिकारियों को पिछले ढाई वर्ष से ध्वनि प्रदूषण फैला रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निरंतर लेटर लिख रहा हूं. सीएम कार्यालय से कार्रवाई के निर्देश आते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता है. इस बार भी 25 जनवरी तक शिकायत का निस्तारण करने के आदेश हैं. यदि, 25 जनवरी तक कुछ नहीं होता है, तो सीएम के नाम निराशा के साथ आखिरी पत्र लिखूंगा.

मनमोहन मेहरोत्रा, शिकायतकर्ता