- बीआरडी के आर्थो, गायनी, जनरल सर्जरी, ट्रामा आईसीयू, ट्रामा इमरजेंसी, न्यूरो सर्जरी में हुए ऑपरेशन, ईएनटी, आई ओटी ठप

-शुक्रवार को दो दर्जन से अधिक किए गए ऑपरेशन

- चार एनेस्थेटिक्स के इस्तीफे के बाद चिकित्सकीय सुविधा को सुधारने में जुटा अमला

GORAKHPUR: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनेस्थिसिया डिपार्टमेंट में चल रहा विवाद अभी तक शांत नहीं हो सका है. कॉलेज प्रशासन और इस्तीफा देने वाले चार डॉक्टर्स के बीच वार्ता विफल रही. शुक्रवार को भी डॉक्टर्स नहीं पहुंचे. प्रिंसिपल ने विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी अब पूर्व प्रिंसिपल डॉ. राकेश सक्सेना को सौंप दी है. उधर एनेस्थिसिया के चारों डॉक्टर्स के असहयोग के बावजूद शुक्रवार को दो दर्जन से अधिक मरीजों के ऑपरेशन हुए. बताते चलें कि बीआरडी में बुधवार को एनेस्थिसिया डिपार्टमेंट के छह में से चार डॉक्टर्स ने इस्तीफा दे दिया. चारों डॉक्टर्स ने प्रिंसिपल डॉ. गणेश कुमार और प्रवक्ता व जनरल सर्जरी डॉ. यूसी सिंह पर गंभीर आरोप लगाए. इसके बाद से कॉलेज में ऑपरेशन पर संकट के बादल मंडराने लगे.

सीनियर रेजीडेंटों ने संभाली कमान

एनेस्थिसिया डिपार्टमेंट में इस समय प्रभारी एचओडी डॉ. शाहबाज अहमद और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संतोश कुमार शर्मा तैनात है. दोनों डॉक्टर सुबह से ही विभाग में मुस्तैद रहे. उन्होंने गायनी, आर्थो, जनरल सर्जरी, ट्रामा आईसीयू, ट्रामा इमरजेंसी और न्यूरो सर्जरी विभाग के ऑपरेशन की जिम्मेदारी एक-एक सीनियर रेजीडेंट को सौंप दी. सीनियर रेजीडेंटों की मदद को 11 जूनियर रेजीडेंट मौजूद रहे. एनेस्थिसिया डॉक्टर्स की इस टीम ने करीब 25 मरीजों का ऑपरेशन कराया.

असफल रही वार्ता

विवाद को खत्म कराने के लिए दोनों पक्षों के बीच गुरुवार की शाम को समझौता कराने की कोशिश कुछ सीनियर डॉक्टर्स ने की. इस दौरान दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी. लेकिन यह पहल परवान नहीं चढ़ी. इस्तीफा देने वाले डॉक्टर्स पर आरोप लगाया कि वे समय से ड्यूटी नहीं करते. हाजिरी रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर गायब हो जाते हैं. प्रिंसिपल की जांच में वह गैरहाजिर मिले हैं. उनके रवैये के कारण प्रतिदिन सुबह 9.30 बजे विभाग के हाजिरी रजिस्टर की जांच हो रही है.

पि्रंसिपल बुलाए तो बन सकती है बात

बीआरडी से चार एनेस्थिसिया के इस्तीफे के बाद चिकित्सकीय व्यवस्था पर खासा असर पड़ने लगा है. एनेस्थिसिया डॉ. नरेंद्र देव ने बताया कि हम लोगों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है. जिस समय बीआरडी की स्थिति काफी खराब हो गई थी और आईसीयू से लेकर तमाम व्यवस्थाएं चरमरा गई थी उस समय हम लोगों ने ईमानदारी से कार्य किया. यदि प्रिंसिपल डॉ. गणेश कुमार बुलाते हैं और सभी की समस्याओं का निदान करते हैं तो काम पर लौटने के लिए तैयार है.