बच्चा वार्ड को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाला प्लांट मिला बंद

ऑक्सीजन गैस सिलिंडर लिकेज से हो जाते हैं खाली

कभी भी हो सकती है दर्दनाक घटना

BAREILLY. गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में 63 बच्चों की मौत होने के बाद पूरे देश में सनसनी मची हुई है. ऐसे में दूसरे हॉस्पिटल्स में स्वास्थ्य सेवाएं सवालों के घेरे में है. बरेली में स्वास्थ्य सेवा का सच जानने के लिए दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का जायजा लिया तो चौंकाने वाला सच सामने आया. ऑक्सीजन की कमी और मशीनों की खराबी मरीजों की जान पर कभी भी भारी पड़ सकती है. इतना ही नहीं, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल पर भी ऑक्सीजन का 15 लाख रुपए बकाया है. आइए पढि़ए ऑक्सीजन सिस्टम का सच..

बंद मिला प्लांट

दैनिक जागरण की टीम सैटरडे दोपहर 12:13 बजे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल पहुंची तो बच्चा वार्ड को सप्लाई देने वाला ऑक्सीजन प्लांट बंद पाया गया. प्लांट में ऑक्सीजन सिलिंडर खाली थे, लेकिन जिम्मेदार व्यक्ति ने उसे चेक करना जरूरी नहीं समझा. हालांकि, प्लांट पर रिपोर्टर को देखते ही कर्मचारी हरकत में आ गए. आनन फानन में ऑक्सीजन सिलिंडर्स को सप्लाई प्वाइंट से जोड़ा गया. इसके बाद भी सप्लाई शुरू नहीं हो सकी तो देखा गया कि मेन स्वीच ही ऑफ है. टेक्नीशियन को बुलाकर प्लांट को स्टार्ट कराया गया.

मैनीफॉल्ट बाक्स खराब

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के बच्चा वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए लगाए गए मैनीफाल्ट बाक्स खराब मिले. ये बॉक्स बच्चे को आक्सीजन देने के लिए जरूरी प्रेशर को मापते हैं. ऐसे में वार्ड में यदि कोई गंभीर बच्चा आता है तो उसे इमरजेंसी में आक्सीजन नहीं मिल सकती.

रोजाना आते हैं 60 पेशेंट

जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में हर दिन लगभग 60 बच्चे आ रहे हैं. इन बच्चों में लगभग 15 बच्चों को ऑक्सीजन की जरूरत रहती है. ऐसे में विभाग ने वार्ड को तीन हिस्सों में बांट रखा है. ऑक्सीजन की जरूरत वाले बच्चों को एक साथ रखा गया है.

20 सिलिंडर की है खपत

बच्चा वार्ड में भर्ती बच्चों के लिए प्रतिदिन 20 आक्सीजन के सिलिंडर खर्च हो जाते हैं. दिन में दो बार सुबह और शाम को सप्लाई होती है. वार्ड में सप्लाई को रेगुलर रखने के लिए पांच लोगों का स्टाफ रखा गया है, लेकिन मौका मिलते ही ये लोग गायब हो जाते हैं.

प्राइवेट फर्म से आ रही सप्लाई

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई चौपला रोड स्थित अशोका गैस एजेंसी करती है. जो दिन में दो बार अपने या अस्पताल के वाहन से सिलिंडर्स को वार्डो तक पहुंचाती है. कई बार वाहन न मिलने पर ऑक्सीजन सप्लाई में देरी भी हो जाती है.

कंपनी का है 15 लाख बकाया

जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एजेंसी का स्वास्थ्य विभाग पर 15 लाख रूपये बकाया है. ऐसे में एजेंसी ने कई बार विभाग को भुगतान कराने के लिए रिमाइंडर नोटिस भी दिया है. यदि जल्द भुगतान नहीं कराया गया तो सप्लाई को कभी भी बंद कर दिया जाएगा.

ऑक्सीजन के लिए नहीं है बजट

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में ऑक्सीजन जैसी महत्वपूर्ण सुविधा के लिए कोई बजट ही नहीं है. ऑक्सीजन सप्लाई को रेगुलर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग रोगी कल्याण समिति के बजट से काम चला रहा है. गवर्नमेंट से आने वाले बजट में ऑक्सीजन के लिए कोई बजट न आना एक बड़ी चिंता की बात है.

निजी अस्पतालों में अमानक ऑक्सीजन

बरेली के कई निजी अस्पतालों में मानकों के विपरित ऑक्सीजन सप्लाई होती है. इसका खुलासा फरवरी में फरीदपुर में पकड़ी गई फर्जी फैक्ट्री से हुआ था, जिसका संचालक फैक्ट्री को सप्लाई की जाने वाली ऑक्सीजन को हॉस्पिटल्स को बेच रहा था, जिसमें श्री सांई हॉस्पिटल और आला हजरत हॉस्पिटल के नाम सामने आए थे. फैक्ट्री को सीज किए जाने के बाद इन हॉस्पिटल्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को लेटर जारी किया गया था.

कलर कोडिंग होती है पहचान

मानक के अनुकूल और सही ऑक्सीजन सिलिंडर की पहचान कलर कोडिंग से होती है. ऑक्सीजन के सिलिंडर के मेन नोजल पर व्हाइट कलर होने के साथ सीरियल नंबर होता है. जिससे सिलिंडर का ऑक्सीजन का होना तय होता है.

सप्लायर को दिया नोटिस

गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी का मसला तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य महकमा ने ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वाली एजेंसी को नोटिस भेजकर अपने बकाया भुगतान के बारे में जानकारी मांगी है.

सभी वार्डो में अलर्ट जारी करा दिया गया है. ऑक्सीजन की कमी होने पर तुरंत सूचना दें. प्लांट बंद होना एक गंभीर घटना है जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी. डॉ. केएस गुप्ता, सीएमएस