लाहौर (पीटीआई)। पाकिस्तान में जल्द ही लाहौर स्थित सादमन चौक को भगत सिंह के नाम से जाना जाएगा। दरअसल, लाहौर हाई कोर्ट ने बुधवार को लाहौर जिला प्रशासन को इस लंबित मुद्दे पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया है। भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज राशिद कुरैशी की याचिका पर कोर्ट ने यह निर्देश दिया है। गौरतलब है कि जिस जगह यह चौक है पहले वहीं पर लाहौर सेंट्रल होता था। यहीं पर भगत सिंह को उनके दो अन्य साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी।

कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नर को दिया निर्देश
जस्टिस शाहिद जमील खान ने लाहौर के डिप्टी कमिश्नर से कहा है कि वह इस लंबित मामले पर फैसला करें। याचिकाकर्ता का कहना है कि भगत सिंह इस उपमहाद्वीप के स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने साथियों के साथ प्राण त्याग दे दिए। कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने भी उनको श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि उनके जैसा साहसी व्यक्ति पूरे उपमहाद्वीप में नहीं पैदा हुआ। पाकिस्तान और विश्व के लोगों को प्रेरणा मिल सके, इसके चलते उन्होंने चौक पर भगत सिंह की मूर्ति लगाने का भी अनुरोध किया है।

2013 में दाखिल की याचिका
बता दें कि म्तियाज राशिद कुरैशी पेशे से एक वकील होने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता हैं। कुरैशी ने 2013 में लाहौर हाईकोर्ट में दाखिल कर भगत सिंह की फांसी का सच सामने लाने का अनुरोध किया। याचिका में कहा गया था कि भगत सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे, वो बंटवारे के पहले अविभाजित भारत की आजादी के लिए लड़ रहे थे और उनके ऊपर जो भी आरोप लगाए थे वो झूठे थे। इसके लिए उन्‍होंने 2014 में एक एफआईआर प्रस्‍तुत की जिसके अनुसार जिस केस में भगत सिंह को फांसी दी गई थी उस एफआईआर में उनका नाम ही नहीं था। साथ ही उन्‍हें रजिस्ट्रार के फैसले पर ही फांसी दे दी गई जबकि उसके पास ऐसा कोई अधिकार होता ही नहीं है। उन्‍होंने अपने केस में यही दलीलें दी हैं। कुरैशी मानते हैं कि भगत सिंह की न्यायिक हत्या की गई थी। उनकी मांग थी कि ब्रिटिश गवरमेंट भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के परिवार से माफी मांगे और हर्जाना दे।

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