इस्लामाबाद (पीटीआई)। पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति बने डॉ. आरिफ अल्वी का भारत से खास नाता है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, डॉ. आरिफ अल्वी के पिता स्व. हबीब उर रहमान इलाही अल्वी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के डेंटिस्ट थे। बता दें कि 69 वर्षीय आरिफ अल्वी मंगलवार को पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के उम्मीदवार ऐतजाज अहसान और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के उम्मीदवार मौलाना फजल उस रहमान को हराकर पाकिस्तान के 13वें राष्ट्रपति के रूप में चुने गए हैं। वे नौ सितंबर को पद के लिए शपथ लेंगे।
पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति बने आरिफ अल्वी का भारत से है खास नाता
इमरान खान के हैं करीबी
अल्वी भी पेशे से दांतों के डॉक्टर रह चुके हैं और इन्हें प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी माना जाता है। अल्वी, पाकिस्तान तेहरिक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से भी एक हैं। बता दें कि अल्वी, पाकिस्तान के पहले ऐसे राष्ट्रपति नहीं हैं, जो विभाजन के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए थे। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का परिवार भी विभाजन के बाद नई दिल्ली से पाकिस्तान चला गया था। अल्वी का पूरा नाम, डॉ. आरिफ उर रहमान अलवी है और इनका जन्म 1947 में कराची में हुआ था, जहां उनके पिता विभाजन के बाद बस गए थे। आरिफ उर रहमान अल्वी की पत्नी का नाम समीना अल्वी है और दोनों के चार हैं। अल्वी के पिता स्व. हबीब उर रहमान इलाही अल्वी ने आगरा से पाकिस्तान जाने के बाद कराची के सद्दार में फिर से दांतों के इलाज का प्रक्टिस शुरू कर दिया था।

50 साल पहले की अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत
अल्वी ने 50 साल पहले अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की थी। वे जब लाहौर में पंजाब विश्वविद्यालय के एक सहयोगी डेमोंटोनेंसी कॉलेज ऑफ देंटिस्ट्री के छात्र थे तब उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य शासक अयूब खान के खिलाफ जमकर विरोध किया था। पीटीआई वेबसाइट के मुताबिक, लाहौर के मॉल रोड पर हुए कई विरोधों में से एक में उन्हें गोली मार दी गई थी, जिसमें वे घायल हो गए। अभी भी वे गर्व से अपने दाहिने हाथ में लगी उस गोली के निशान को शान से दिखाते हुए कहते हैं कि ये लोकतंत्र की निशानी है।

2013 में बने सांसद
उन्होंने 1979 में जमात-ए-इस्लामी के मंच से चुनाव में भाग लिया लेकिन हार गए। बाद में वह जमात-ए-इस्लामी की राजनीति से भ्रमित हो गए और 1996 में संस्थापक सदस्य के रूप में पीटीआई में शामिल हो गए। उन्होंने नई पार्टी के संविधान को लिखने में भी मदद की। 1997 में अल्वी ने पीटीआई के लिए अपना पहला चुनाव लड़ा लेकिन इसमें भी वो हार गए। वह 2006 से 2013 तक पार्टी के महासचिव रहे। 2013 में उन्हें निर्वाचन क्षेत्र एनए-250 कराची से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य के रूप में चुना गया और जुलाई 2018 में वे फिर इसी क्षेत्र से सांसद के रूप में चुने गए।
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