आगरा. ये दुर्भाग्य की बात है कि आज के दौर में भी नारी को सशक्त बनाने की बात चल रही है. औरत, जिसे शक्ति कहा जाता है, उसको भी सशक्तीकरण की जरूरत है. इस सोच को बदलना होगा. कुछ ऐसे ही विचार बुधवार को विभिन्न फील्ड में उल्लेखनीय कार्य करने वाली शहर की प्रमुख महिलाओं ने रखे. मौका था दैनिक जागरण-आईनेक्स्ट की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'महिलाओं के सशक्तीकरण' के विषय पर आयोजित परिचर्चा का. इसमें अतिथि संपादक के रूप में मौजूद महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखते हुए महिला सशक्तीकरण के लिए पांच टूल्स शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सम्मान और सहभागिता को जरूरी बताया. साथ ही अतिथि संपादकों ने अखबार के लिए खबरों का चयन भी किया.

नाइट जॉब में महिलाओं का आना जरूरी

परिचर्चा में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें नाइट जॉब में अपनी सहभागिता को बढ़ाने पर जोर दिया गया. डॉ. शिवानी चतुर्वेदी ने बताया कि रात को शहर पुरुषों का हो जाता है. महिला अपने घर से निकल नहीं पाती. हॉस्पिटल, होटल या किसी भी सेक्टर में देख लें, रात को महिला कर्मचारियों की संख्या न के बराबर हो जाती है. इसे बदलना चाहिए. दिव्या गोयल ने बताया कि सेफ्टी पैरामीटर्स बढ़ाए जाने चाहिए. इससे महिलाएं अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकें. डॉ. हेना ने बताया कि एक बार गोवा में छुट्टियां बिताने के दौरान पति के साथ जब रात को होटल से बाहर निकले, तो पार्किंग में हमें महिला कर्मचारी ने स्लिप दी. ये देखकर बहुत अच्छा लगा कि नाइट जॉब में महिलाओं की सहभागिता बढ़ रही है.

एजुकेशन की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें

डॉ. आराधना भास्कर ने बताया कि एजुकेशन की कमी ने महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कम उम्र में शादी और फिर मां बनना उनके जीवन को बहुत मुश्किल बना देता है. गांव-देहात में बच्चियां छोटी कक्षाओं तक पढ़ पाती हैं. जब उन्हें उच्च शिक्षा चाहिए होती है तो गांव से बाहर अनहोनी के डर के कारण वे अपनी शिक्षा जारी नहीं रख पाती. स्मृति अग्रवाल ने बताया कि हमारे देश में कम उम्र में शादी होने को रोकने के लिए कानून बने हैं, लेकिन उस शादी को अवैध करने का कोई कानून नहीं बना जो बाल विवाह को रोकने में बहुत प्रभावी होगा. देश के कानून को और इम्प्रूव करना होगा.

लड़कों को देनी होगी सीख

परिचर्चा में बताया गया कि लड़कों को भी इस संबंध में एजुकेशन देने की जरूरत है. आज आगरा के अधिकांश स्कूल ऐसे हैं जहां छुट्टी होने पर लड़कियां बाहर के लड़कों की फब्तियों का शिकार होती है. उनके कमेंट्स का लड़कियों पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. ऐसे में लड़कों को भी नारी की गरिमा का ध्यान रखना और उन्हें इज्जत देने की सीख देनी चाहिए. यह सीख बचपन से ही मिलनी शुरू हो जानी चाहिए.