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से अधिक रोज परमिट, फिटनेस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट इश्यू किए जाते हैं आरटीओ आफिस से

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सर्टिफिकेट प्रतिमाह लखनऊ मुख्यालय से प्रिंट वाला सर्टिफिकेट भेजा जाता है

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दिन से मुख्यालय से प्रिंट कागज न आने के कारण यहां काम पेंडिंग हो गए हैं

10000

से अधिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस आदि के काम रुके हुए हैं

आरटीओ आफिस में परमिट, फिटनेस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट इश्यू होना बंद

dhruva.shankar@inext.co.in

ALLAHABAD: जो काम सरकार की योजनाएं नहीं कर पाई उसे महंगाई ने कर दिया है. इस समय एक प्रमुख सरकारी महकमा आरटीओ आफिस पेपरलेस हो गया है. कारण कागज की कीमतों में बढ़ोत्तरी है. इस समय यहां रजिस्ट्रेशन, परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि पिछले बीस दिनों से मुख्यालय सर्टिफिकेट नहीं भेज रहा है. अब कागज मिलने की उम्मीद नई टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही है.

बीस दिनों से बाधित है प्रक्रिया

आरटीओ आफिस में दस जुलाई के बाद से वाहन स्वामियों को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट इश्यू नहीं किया जा रहा है. इसके साथ ही वाहनों के परमिट व फिटनेस का सर्टिफिकेट भी देना बंद कर दिया गया है. बीस जुलाई से एक अगस्त तक आफिस सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण रजिस्ट्रेशन के लिए हजारों वाहन स्वामी लाइन में लग गए हैं. यहां प्रतिदिन सर्टिफिकेट काउंटर पर रोज तीन सौ से चार सौ वाहन स्वामी पहुंच रहे हैं और मुख्यालय से कागज नहीं आने की सूचना पाकर लौट जा रहे हैं.

दस हजार केस हैं पेंडिंग

परिवहन विभाग के लखनऊ स्थित मुख्यालय से आफिस में प्रतिमाह पंद्रह हजार की संख्या में ए फोर साइज से थोड़ा बड़ा प्रिंट सर्टिफिकेट आता रहता था. इसके जरिए नए वाहनों को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट व समय-समय पर वाहन स्वामियों को फिटनेस सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता था. लेकिन कागज की कमी के चलते पंद्रह जुलाई के बाद से अब तक दस हजार लोगों का सर्टिफिकेट बनाने का केस पेंडिंग पड़ा है.

मार्केट में बढ़ी पंद्रह रुपए कीमत

सरकारी महकमे में कागजों पर महंगाई का असर दिखाई देने के पीछे मार्केट में ए फोर साइज के कागजों की कीमतों को माना जा रहा है. विश्वविद्यालय मार्ग स्थित कई स्टेशनर्स पर चार महीने पहले ए फोर की एक रील की कीमत चालीस रुपए थी उसमें पिछले दो महीनों में दस से पंद्रह रुपए का इजाफा हो गया है. स्टेशनर्स विजय कुमार की मानें तो यहां लखनऊ और कानपुर से कागज आता है. कीमतें बढ़ने पर कागजों की शार्टेज हो गई है. इस वजह से कागजों की कीमतों में और अधिक बढ़ोत्तरी होगी.

मुख्यालय से प्रतिमाह पंद्रह हजार प्रिंट वाला सर्टिफिकेट इश्यू किया जाता है. कई दिनों से सर्टिफिकेट नहीं भेजा रहा है. इसकी कमी यहीं नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में है. स्टाक में रखे प्रिंट कागजों को मंगवाने के लिए पत्र लिखा गया है.

सगीर अहमद अंसारी, आरटीओ