-पार्षदों के धरने के चलते स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नहीं हो रहे काम

-मल्टीलेवल पार्किंग, मॉडल रोड और नालों की सफाई का काम पड़ा है बंद

बरेली : नगर आयुक्त से विवाद के चलते पार्षद नगर निगम में लगभग दस दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जिससे नगर आयुक्त छुट्टी पर चले गए थे। लेकिन शहर के जिम्मेदारों के विवाद के चलते बरेली को स्मार्ट बनाने की कई योजनाएं अधर में लटकी हैं। इसमें कई योजनाएं तो ऐसी है, जिनकी डेडलाइन खत्म हो गई। वहीं, कई योजनाओं को विवाद के चलते आगे बढ़ा दिया गया। नगर आयुक्त और पार्षदों के विवाद का खामियाजा पब्लिक को भुगतना पड़ रहा है।

स्मार्ट सिटी के तहत इन योजनाओं पर होना था काम

1. ऐलन क्लब में मल्टी लेवल पार्किंग

स्मार्ट सिटी योजना के तहत निगम के सामने सब्जी मंडी की जगह पर मल्टी लेवल पार्किंग बनाई जानी है। नगर आयुक्त के आदेश पर कार्य योजना भी तैयार कर ली गई थी, लेकिन पार्षदों के धरना प्रदर्शन के चलते नगर आयुक्त छुट्टी पर चले गए। जिससे शासन को बजट स्वीकृति के लिए फाइल नहीं भेजी जा सकी।

कुतबखाना का भी अटका प्रस्ताव

कुतुबखाना में घंटाघर से पहले वाली रोड पर पार्किंग बननी थी। इसके लिए मार्च माह में नाप-जोख की गई थी। मई में शासन को प्रस्ताव भेजा जाना था, लेकिन विवाद के चलते ऐसा नहीं हो सका।

2. सड़क बनी पर नहीं हो सकी मॉडल

राजेंद्र नगर में सिलेक्शन टॉवर वाली रोड को मॉडल बनाने का निर्णय हुआ था। शासन की ओर से 4 करोड़ का बजट भी निगम को मिल गया। मई लास्ट तक इसका काम पूरा करना था। लेकिन नगर निगम में विवाद के चलते इसके काम को दो माह के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। अभी सिर्फ 50 फीसदी ही काम हो सका है।

3. चोक नाले डुबाएंगे शहर

पार्षदों और नगर आयुक्त के विवाद के चलते नाला सफाई का काम भी अधर में लटका हुआ है। नगर निगम को शहर के 120 नालों की सफाई की योजना मई के शुरुआत में बना ली थी। इसमें 103 छोटे नालों की सफाई तो हो रही है, लेकिन 17 बड़े नालों का काम अटका हुआ है। क्योंकि इसके लिए जून में निगम की ओर से टेंडर जारी किया जाना था। लेकिन धरने के चलते टेंडर प्रक्रिया को दो सप्ताह आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

पब्लिक हो रही परेशान

एक जून से कई पार्षद साथी पार्षद पर हुए मुकदमे को वापस लेने के लिए धरने पर बैठे हैं। जिससे निगम में कोई भी काम नहीं हो रहा है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी पब्लिक को हो रही है। पब्लिक अपनी समस्या लेकर निगम जा रही है पर धरने के चलते उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं हो रहा है। निगम से प्राप्त आंकड़ों की बात करे तो पिछले दस दिनों में सफाई, जलभराव संबंधी 50 शिकायतें निगम के कंट्रोल रुम में आई लेकिन दस शिकायतों का निस्तारण हो सका है।

मांगों पर अड़े पार्षद

नगर आयुक्त पिछले सात दिनों से अवकाश पर थे। ट्यूजडे को उनके ऑफिस आने की भनक लगते ही पार्षदों का धरना उग्र हो गया। पार्षदों ने नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर जमकर नगर आयुक्त के विरोध में नारे लगाए। पार्षद चमन सक्सेना ने बताया कि नगर आयुक्त आईएएस हैं लेकिन उन्हें मर्यादा में रहने की जरुरत है। बिना किसी साक्ष्य के एक पार्षद पर मुकदमा दर्ज कराना, शासनादेश की अवहेलना करना है। जब तक वह मुकदमा वापस नहीं लेंगे, उन्हें कार्यालय में नहीं बैठना दिया जाएगा।

सिटी मजिस्ट्रेट भी लौटे बैरंग

नगर आयुक्त के अवकाश से वापस लौटने की भनक हर किसी को थी, सुबह से ही निगम में भारी पुलिस बल तैनात था, लेकिन नगर आयुक्त कार्यालय नही आए। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार दोपहर 12 बजे निगम पहुंचे और पार्षदों को समझाने का प्रयास किया लेकिन पार्षदों ने उनसे वार्ता करने से इन्कार कर दिया।

वर्जन

धरने से सबसे अधिक विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पार्षद आलाधिकारियों के कार्यालय में ही बैठकर धरना शुरू कर देते हैं। जिससे कई योजनाओं के शुरुआत संबंधी फैसले नही लिए जा रहे हैं। कई विकास कार्यो की समय-सीमा में परिवर्तन कर इनको आगे बढ़ाया गया है।

ईश शक्ति कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त।