पटाखों से जलकर हॉस्पिटल पहुंचे दर्जनों मरीज, गंभीर मरीज हुए रिफर

पटाखों की धमक व जहरीले धुंए से बढ़ी दिल सांस के मरीजों की मुश्किल

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ALLAHABAD: दीपावली पर पटाखे जलाने में हुई लापरवाही ने दर्जनों का त्योहार का मजा खराब कर दिया. कई मरीज आग और चिंगारी से जख्मी होकर पहुंचे तो गंभीर मरीजों रिफर कर दिया गया. पूरी सुविधा नही मिलने से कई लोगों को प्राइवेट हॉस्पिटल्स की भी शरण लेनी पड़ी. इसके अलावा दिल और सांस के मरीजों को धमाकों और धुएं से खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. आनन-फानन में उन्हें डॉक्टरी इलाज की मदद लेनी पड़ी.

मुफ्त में मोल ली मुसीबत

पटाखों को जलाने में होशियारी बरतने की अपील को अनसुना करने वालों के लिए दिवाली की रात काली हो गई. हॉस्पिटल्स में ऐसे कई मरीज पहुंचे जिनके हाथ पटाखों से जख्मी हो गए थे. बेली हॉस्पिटल के सीएमएस डॉ. वीके सिंह ने बताया कि इमरजेंसी आने वालों में बच्चे और युवा ज्यादा थे. उनको तत्काल इलाज मुहैया कराया गया. अधिकतर मरीजों ने बताया कि पटाखा हाथ में छूट जाने से वह बुरी तरह जल गए. कुछ मरीज ऐसे थे जिनके आंख या शरीर के दूसरे हिस्सों में चिंगारी पड़ जाने से चोट लग गई थी. उन्हें भी इलाज मुहैया कराया गया. यही हाल एसआरएन और कॉल्विन हॉस्पिटल का भी रहा. प्राइवेट हॉस्पिटल जाने वाले मरीजों की संख्या भी अच्छी खासी रही.

दमा, एलर्जी के मरीजों पर आफत

पटाखों की बारुद से निकलने वाला धुआं दमा और एलर्जी के मरीजों पर कहर बनकर टूटा. उन्हें प्रदूषण का स्तर हाई हो जाने से सांस लेने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. चेस्ट फिजीशियन डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में दर्जनों ऐसे मरीज आए जिन्होंने सांस फूलने और खांसी की शिकायत बताई. उन्हें इलाज मुहैया कराकर त्योहार पर बंद कमरे में रहने की सलाह दी गई. उन्होंने बताया कि पटाखों के धुएं में शामिल हानिकारक केमिकल की वजह से ऐसे मरीजों की श्वांस नली में सिकुड़न आने से अधिक दिक्कत हुई. इसी तरह हॉस्पिटल्स में दिल के मरीजों ने भी दस्तक दी. तेज आवाज की वजह से उनकी दिल की धड़कनें बढ़ रही, जिससे उन्हें भर्ती करना पड़ा.

सुन्न हो गए कान के पर्दे

मरीजों की एक बड़ी तादाद ऐसी रही जिनकी सुनने की शक्ति पटाखों की तेज आवाज से प्रभावित हुई. कईयों ने बताया कि नजदीक हुए बम के धमाके से उनके कान सुन्न हो गए और तेज दर्द होने लगा. जांच में पता चला कि धमाके से कान के पर्दे क्षतिग्रस्त हो गए हैं. उन्हें तत्काल इलाज मुहैया कराया गया. डॉक्टरों ने बताया कि बेहद नजदीक निर्धारित मानक 42 डेसीबल से अधिक ध्वनि होने पर कान के पर्दो पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. इसीलिए तेज धमाके वाले पटाखों को दूर से बजाने की चेतावनी जारी की जाती है.