-स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण वाले दिन भी हुई एक मौत

-निरीक्षण के दूसरे दिन भी नहीं सुधरे हालात बेकाबू हुआ बुखार

एक माह से थी बीमार

सीबीगंज के गांव रौठा निवासी सिपट्टर सिंह ने बताया कि 8 वर्षीय बेटी अंजलि एक माह से बीमार थी. वह उसका सीबीगंज में ही इलाज करा रहे थे. जहां डॉक्टर ने उसे पीलिया बताया. इसी दौरान उसे बुखार भी आने लगा. एक सप्ताह से बुखार और पीलिया में कोई फायदा नहीं हुआ तो वह वेडनसडे सुबह बेटी को लेकर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल पहुंचे. सुबह नौ बजे से लाइन में लगकर पहले पर्चा बनवाया उसके बाद ओपीडी में दो घंटे लाइन में लगने के बाद बच्ची को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तब कहीं जाकर डॉक्टर ने बच्ची को एडमिट कराने के लिए लिखा. 12 बजे अंजलि को बच्चा वार्ड में एडमिट कराया. डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया, लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ और उसकी हालत बिगड़ती चली गई. करीब सवा बजे अंजलि ने दम तोड़ दिया. सिपट्टर सिंह ने बताया कि वह मजदूरी करके परिवार को पालता है. उसके परिवार में पत्नी शीतल और एक 4 वर्षीय बेटी निधि हैं.

लापरवाही का लगाया आरोप

सिपट्टर ने बेटी की मौत के बाद डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगाया. सिपट्टर का आरोप है कि वह सुबह 9 बजे से पर्चा काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए एक घंटा लगा रहा उसके बाद साढ़े ग्यारह तक ओपीडी में लाइन लगाने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचा तो मासूम के लिए 12 बजे एडमिट करा पाया. इसके बाद बच्चा वार्ड में भी इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई. उसका कहना है कि काश समय पर उसकी बेटी को इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती.