RANCHI : रिम्स में डाइट को लेकर शिकायत कोई नई बात नहीं है। कभी खाने में कीड़ा मिलने की शिकायत की गई तो कभी बासी खाना परोसने का मामला सामने आया। अब रिम्स में इलाजरत मरीजों को दोपहर में बनाई गई रोटी रात के खाने में परोसी जा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रात तक रोटियों की क्या हालत होती होगी। ऐसे में मरीजों के सामने दोपहर की बनी रोटी खाने के अलावा कोई चारा नहीं है। नहीं तो उन्हें भूखे ही सोना पड़ जाएगा। इसके बावजूद एजेंसी पर न तो डाइटीशियन कोई कार्रवाई कर रही हैं और न ही मैनेजमेंट इस ओर ध्यान दे रहा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर मरीजों की सेहत से खिलवाड़ पर लगाम कब लगेगी?

दोपहर 1 बजे पकाया रात का खाना

मरीजों के लिए खाना बनाने को लेकर हॉस्पिटल के किचन में हाइटेक मशीनें लगाई गई है। वहीं रोटी बनाने के लिए दो रोटी मेकर मशीनें भी हैं। लेकिन रोटी मेकर मशीन में खराबी आ गई है। अब इस चक्कर में मरीजों को रात में परोसी जाने वाली रोटी को दोपहर एक बजे ही पका दिया जा रहा है। इसके बाद शाम को सात बजे के बाद मरीजों के बेड पर उन्हें खाना पहुंचाया जाता है। ये रोटियां गर्मी के कारण खाने लायक नहीं रह जातीं। लेकिन मरीजों के पास यह खाने के अलावा कोई चारा भी नहीं है।

1442 मरीज एडमिट हैं इनडोर में

हॉस्पिटल में हर दिन 1500 मरीज इलाज के लिए भर्ती रहते हैं। शुक्रवार को भी इनडोर में 1442 मरीज एडमिट थे, जिसमें से कुछ मरीज लिक्विड डाइट वाले थे। जबकि अधिकतर मरीजों को खाने में रोटी परोसी गई। रात तक ये रोटियां खाने की स्थिति में नहीं थीं। गर्मी होने के कारण रोटियां सूख गई थी। इसके बाद भी वही रोटियां मरीजों को परोसी जा रही हैं। मरीजों को न चाहते हुए भी हर दिन वही रोटियां खानी पड़ रही हैं।

3 बजे के बाद पकाना है रात का खाना

मरीजों को बेड पर डाइट उपलब्ध कराने का काम दिल्ली की प्राइम किचन सर्विस को दिया गया है। यह एजेंसी सुबह नाश्ते से लेकर रात तक खाना उपलब्ध कराती है। ऐसे में एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी हाल में रात का खाना तीन बजे के पहले नहीं बनाएगी। इसके बावजूद मरीजों को दिया जाने वाला खाना एक बजे से ही तैयार किया जा रहा है।