- 390 बेड ट्रॉमा सेंटर में

- 453 बेड एक्स्ट्रा बेड के बाद

- 500 से अधिक कुल भर्ती मरीज

रोज पहुंच रहे मरीज

13 सितंबर-328

12 सितंबर-325

11 सितंबर-350

10 सितंबर-332

-सीजनल फीवर ने बढ़ाई समस्या, मेडिसिन और बाल रोग में बेड नहीं

-दूसरे अस्पतालों से सामान्य मरीज भी ट्रॉमा किए जा रहे रेफर

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LUCKNOW:

सांस, बुखार, किडनी, लिवर या अन्य मेडिसिन से संबंधित बीमारियों के गंभीर मरीज या गंभीर हालत में बच्चों को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर ले जाने से पहले जानकारी कर लें. हो सकता है वहां पहुंचने के बाद आपको बेड के साथ ही स्ट्रेचर पर भी भर्ती होने के लिए जगह न मिले. पिछले कई दिनों से ट्रॉमा सेंटर में यह स्थिति है. मेडिसिन और बाल रोग विभाग में दोपहर एक से दो बजे ही बेड फुल होने का नोटिस जारी कर दिया जा रहा है. दूसरे बड़े अस्पतालों से सामान्य मरीजों को भी ट्रॉमा रेफर किए जाने के कारण समस्या बढ़ी है.

दोपहर से ही नो-बेड

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर में मेडिसिन और बाल रोग विभाग की इमरजेंसी के मरीजों की संख्या पिछले कई दिनों से अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है. मरीजों की संख्या बेड्स की उपलब्धता से कई गुना अधिक पहुंच रही है. आलम यह है कि शुक्रवार को दोपहर एक बजे ही मेडिसिन विभाग से इमरजेंसी में बेड उपलब्ध न होने का नोटिस पहुंच गया जबकि इमजरेंसी खचाखच भरी थी. मेडिसिन विभाग में भर्ती सभी बेड फुल थे तो सभी के बगल में स्ट्रेचर डाल कर भी मरीज भर्ती किए गए. स्ट्रेचर भी कम पड़ गए जिसके बाद मरीजों की भर्ती बंद करनी पड़ी.

बेड 300 भर्ती 400 मरीज

मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि मरीजों की संख्या बहुत बढ़ गई है. सिर्फ गंभीर मरीजों को ही ट्रॉमा भेजा जाए ताकि उन्हें यहां इलाज मिल सके. मेडिसिन विभाग में ट्रॉमा व गांधी वार्ड को मिलाकर कुल 300 बेड हैं, लेकिन मरीज 400 से अधिक भर्ती हैं.

आधे से अधिक हो रहे वापस

ट्रॉमा सेंटर में पिछले कई दिनों से रोजाना पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 320 से 350 तक बनी हुई है जबकि मरीजों की भर्ती अधिकतम 120 से 150 तक ही हो पा रही है. बाकी मरीजों को दूसरे अस्पतालों को वापस करना पड़ रहा है. मरीजों की अधिकता के कारण मेडिसिन वार्ड के गेट पर चैनल लगाकर ताला लगाना पड़ रहा है. सुबह 9.30 पर गेट खुलता है और एक दो घंटे में फिर से सभी बेड फुल हो जाते हैं. मेडिसिन विभाग की हालत यह है कि रात में दूसरे जिलों से आने वाले मरीजों को दर दर ठोकरे खानी पड़ रही हैं. रात में आठ बजे के बाद एक्सीडेंटल मरीजों के अलावा अन्य प्रकार की इमरजेंसी वाले मरीजों को गेट से ही वापस करना पड़ रहा है.

जल्दी करनी पड़ रही छुट्टी

राजेश (35) को सीने में दर्द की शिकायत के बाद सर्जरी करनी पड़ी थी. अभी छुट्टी होने में समय है, लेकिन और गंभीर मरीज आने के कारण डॉक्टर्स जल्दी छुट्टी करने के लिए मजबूर हुए और उसे घर जाने को कहा दिया. उसकी जगह एक्सीडेंट के बाद आए अति गंभीर मरीज को भर्ती किया गया.

पीजीआई अपेक्स ट्रॉमा में बेड खाली

जुलाई में रायबरेली रोड पर वृंदावन कॉलोनी में शुरू हुए पीजीआई के अपेक्स ट्रॉमा सेंटर में अभी 60 बेड पर मरीजों के भर्ती करने की सुविधा है, लेकिन यहां पर करीब आधे बेड लगातार खाली चल रहे हैं. शुक्रवार को सिर्फ 35 बेड पर ही मरीज भर्ती थे. ट्रॉमा इंचार्ज व सीएमएस डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि अब मरीजों के लिए न्यूरो सर्जरी और स्पाइन की सर्जरी के प्रोसीजर भी शुरू कर दिए गए हैं. इस प्रकार से अब ट्रॉमा के सभी प्रकार के इलाज की सुविधा शुरू कर दी गई है. पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में बेड खाली रहने का एक कारण यह भी है कि पीजीआई ट्रॉमा दूसरे अस्पतालों से रेफर किए गए मरीजों को भर्ती नहीं कर रहा है. इसके कारण ज्यादातर मरीजों को बिना भर्ती किए ही वापस कर दिया जाता है, जिससे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में ही भार पड़ रहा है.