- फरवरी बाद एयरपोर्ट इन्वायरमेंट मैनेजमेंट कमेटी की मीटिंग नहीं

- मानकों को ताख पर रख कर इस एरिया में बनाए जा रहे अपार्टमेंट

- रेलवे ट्रैक व एयरपोर्ट के बीच बने गड्ढ़े में फेंके जा रहे मरे जानवर

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PATNA: पिछले साल अगस्त महीने के ही एक शनिवार को पटना एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा होते-होते टला था. उस वक्त इंडिगो की फ्लाइट 162 यात्रियों को लेकर जैसे ही दिल्ली के लिए उड़ान भरी कि एक चिडि़या से टकरा गयी. आनन-फानन में पायलट को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. अब ठीक एक साल बाद फिर से यही घटना हुई. संडे को इंडिगो ने जैसे ही दिल्ली के लिए उड़ान भरी कि एक पक्षी एयरक्राफ्ट से टकरा गयी. इस बार विमान में 161 यात्री सवार थे. हालांकि दोनों ही बार फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करा कर बड़ी दुर्घटना को रोका गया, पर सवाल अब भी वही कि आखिर कब तक पायलट का सूझबूझ काम करेगा और यह रिस्क लिया जाता रहेगा.

एएआई कई बार जता चुका है आपत्ति

पटना एयरपोर्ट पर विभिन्न एयरलाइंस में काम कर रहे कई लोगों से बात हुई और इन सबका यही कहना है कि पटना एयरपोर्ट हमेशा खतरे में ही है. लोगों ने कई ऐसी चीज बताई जो हैरत भरे थे. हालत तो ये कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की आपत्ति के बाद भी इन कमियों का अबतक दूर नहीं किया गया है. एयरपोर्ट के आसपास का इलाका जो रेड जोन घोषित है, वहां भी अवैध निर्माण हो चुके हैं. रेलवे ट्रैक का बिजली का खंभा भी रेड जोन में ही आता है, जिसके बारे में कभी विचार ही नहीं किया गया है. बर्ड हिटिंग न हो, इसको लेकर भी एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं. मालूम हो कि पटना एयरपोर्ट की गिनती देश के खतरनाक एयरपोर्ट में होती है. पिछले पंद्रह साल से एयरपोर्ट को दूसरी जगह पर शिफ्ट करने की बात चल रही है, जो अबतक पूरी नहीं हुई है.

रेड जोन में बन आए हैं कई अपार्टमेंट

एयरपोर्ट के आसपास का इलाका रेड जोन में आता है. रेड जोन में महुआ बाग, रूपसपुर, मुसहरी, फुलवारी स्टेशन के आसपास का इलाका, बजरंग कॉलोनी आदि है. नियमत: जो इलाका रेड जोन में आता है, वहां 33 फीट से ज्यादा ऊंचा मकान नहीं बन सकता है. इन कॉलोनियों में कई ऊंचे-ऊंचे अपार्टमेंट तक बन गए हैं. एएआई द्वारा 2011-12 में एयरपोर्ट के आसपास के इलाके का सर्वे किया था. इस दौरान पाया गया था कि आसपास के मोहल्ले के कई मकानों को बिना मानकों को फॉलो किए ही बनाया गया है. इसके बाद इन मकान मालिकों को नोटिस भी जारी हुआ, जिसे आज तक अमल में नहीं लाया गया है. आज भी इन इलाकों में निर्माण कार्य जारी है, जो मानकों को फॉलो नहीं कर रहे हैं.

रेलवे भी है सुरक्षित उड़ान में बाधक

फुलवारीशरीफ स्टेशन के आसपास का इलाका भी एक न एक दिन विमान हादसे की बड़ी वजह बनेगा. एयरपोर्ट की बाउंड्री और रेलवे ट्रैक के बीच के स्पेस में गड्ढ़ा है. इसके साथ ही किनारे-किनारे पेड़ पौधे भी लगे हुए हैं. इस गड्ढ़े में आसपास के मोहल्ले के लोग मरे हुए जानवरों को फेंक देते हैं, जिससे पक्षियां इन इलाकों में मंडराती हैं. रेलवे ट्रैक के बिजली का खंभा भी रेड जोन में आता है. बताया गया कि एएआई ने सर्वे के बाद रेलवे को इस रिगार्डिग लेटर भी लिखा था, लेकिन आजतक इसका सॉल्यूशन नहीं निकाला गया. रेलवे की ओर से अंडरग्राउंड वायरिंग के लिए सर्वे भी कराए गए, पर इस पर भी काम कागजों में ही हो रहा है.

The other side

शनिवार रविवार को हो सकता है बड़ा हादसा

आसपास के लोगों ने बताया कि बामेती के पास स्लम है. इस स्लम में शनिवार और रविवार को जानवरों को काटा जाता है. इसके बाद बचे हुए पा‌र्ट्स को रेलवे ट्रैक के पास ही लोग फेंक देते हैं, साथ ही पटना एयरपोर्ट के आसपास के एरिया में कई मीट शॉप हैं. इस शॉप के अवशेष को भी रेलवे ट्रैक के किनारे डाला जाता है, जिससे चिडि़यां मंडराती रहती हैं. मालूम कि पिछले साल भी अगस्त महीने में शनिवार को ही बर्ड हिटिंग की घटना हुई थी.