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PATNA : इस मीनार की हालत बहुत खराब हो गई है। मीनार के आसपास जंगल उग गए हैं और गंदगी पसरी रहती है। जिम्मेदार इसकी साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गौरतलब है कि यह मीनार ब्रिटिश सरकार पर नवाब मीर कासिम के विजय का प्रतीक माना जाता है, जिसे 1880 में बनवाया था।  राजधानी की सबसे बड़े मीनार की शिखर पर एक अवशेष पात्र है जो मृतकों की याद और ब्रिटिश सम्राज्य के पतन को स्मरण कराता है। इस मीनार में विभिन्न प्रकार की वास्तुकला भी है जो पुराने संगमरमर पर बनी हैं। लोगों की माने तो यह मीनार उसी कुएं पर बना है जहां ब्रिटिश सिपाहियों के मृत शरीर को डाल गया था। इस इलाके को गुरहट्टा नाम से जाना जाता है।

नवाब मीर कासिम ने 1880 में करवाया था मीनार का निर्माण
लगातार ब्रिटिश सरकार से हारने के बाद नवाब मीर कासिम ने मुंगेर में अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बदले की आग तभी नहीं बुझी 11 अक्टूबर 1763 को नवाब मीर कासिम के वफादार सिपाही वाल्टर रीनहार्ट ने ब्रिटिश सरकार के 198 सिपाहियों को मार गिराया। बताते चले कि इन सिपाहियों को पटना सिटी के गुरहट्टा के पास बने एक कुएं में डाल दिया गया था। अपनी विजय की खुशी में नवाब मीर कासिम ने 1880 मेंमीनार का निर्माण कराया।

ब्रिटिश सरकार के मारे गए प्रमुख सैनिकों का नाम भी अंकित
इस मीनार पर ब्रिटिश सरकार के मारे गए प्रमुख 28 सैनिकों का नाम भी अंकित है।  मीनार को देखने नहीं पहुंच रहे पर्यटक एक तरफ राज्य सरकार हर साल देश की आजादी के जश्न में करोड़ों रुपए खर्च करती है वहीं, दूसरी ओर अंग्रेजी हुकूमत पर विजय पाने वाले नवाब मीर कासिम के द्वारा बनवाए गए मीनार के अस्तित्व को खतरे में डाला जा रहा है। मीनार गंदगी और जंगल से पटा हुआ है। कब्रिस्तान में बनी मीनार को देखने प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक आते हैं लेकिन आस पास जंगल झाड़ी उगने से पर्यटक मीनार के पास नहीं जा पाते हैं।

ये पुरातात्विक मामला है। आपसे इस संबंध में जानकारी मिली है। वहां पर सुरक्षा व साफ- सफाई के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी।
कृष्ण कुमार ऋषि, मंत्री कला, संस्कृति एवं युवा विभाग

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