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LUCKNOW : लखनऊ यूनिवर्सिटी इस वर्ष अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। लखनऊ यूनिवर्सिटी की स्थापना और इसके संचालन के इतिहास को लेकर कई लोग दावे करते हैं। वहीं यूनिवर्सिटी के गेट नंबर एक पर सरस्वती प्रतिमा पर लगा पीपल का पेड़ इन सबसे हटकर एलयू के सौ वर्ष के सफर का इकलौता गवाह है। इस पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर देश व प्रदेश के कई राजनेताओं ने अपने करियर को संवारने की दीक्षा प्राप्त की। आज भी यह पेड़ यूनिवर्सिटी में उठने वाली हर आवाज का साक्षी है। फिर चाहे वह छात्र आंदोलन हो या फिर शिक्षक आंदोलन की सभी की शुरुआत इसी पीपल के पेड़ के नीचे से हुई है।

सौ साल पुराना है पेड़
|लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन के ठीक सामने यह पीपल का पेड़ करीब सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ के अध्यक्ष व छात्र नेता रहे प्रो। नीरज जैन बताते हैं कि इस पेड़ की छांव तले राजनैतिक धुरंधरों ने यूनिवर्सिटी छात्रसंघ नर्सरी को सींचा है तो वहीं कुछ ने राजनैतिक करियर शुरू कर अपनी अलग पहचान बनाई। पीपल के पेड़ के नीचे पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा से लेकर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके कई राजनेताओं ने इसी की छांव में राजनीति की एबीसीडी सीखी है। मैंने खुद अपने छात्रसंघ जीवन में कई आंदोलन की शुरुआत इसी पेड़ के नीचे से की है। अरविंद सिंह गोप, रमेश श्रीवास्तव, बृजेश पाठक जैसे प्रदेश के बड़े नेता इसी यूनिवर्सिटी व पीपल के पेड़ की छांव के नीचे बैठकर राजनीति की शिक्षा प्राप्त किया करते थे।

सरस्वती प्रतिमा होने के कारण खास लगाव
प्रो। जैन बताते हैं कि पीपल के पेड़ के नीचे मां सरस्वती की प्रतिमा लगी हुई है, जिस कारण से यूनिवर्सिटी आने वाला हर व्यक्ति इस पेड़ के नीचे आकर अपना मत्था टेकता है। इसके बाद ही वह आगे का कोई कार्य करता है। वह बताते हैं यह पेड़ शुरुआत से ही राजनेताओं के डिस्कशन के लिए बेहतरीन प्वाइंट है। अब भी इसके नीचे आपको मौजूदा समय में यूनिवर्सिटी में सक्रिय छात्र नेता मिल जाएंगे। हालांकि यूनिवर्सिटी में अब एक दशक से छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे हैं। इस पीपल के नीचे आज भी वही महफिल लगती है।

लखनऊ यूनिवर्सिटी के गौरवपूर्ण इतिहास का अगर कोई साक्षी है तो यह पेड़ है। सौ साल से यह पीपल यूनिवर्सिटी के विकास यहां से निकले हर छात्र के सुनहरे भविष्य का गवाह है।

प्रो। नीरज जैन, अध्यक्ष, लूटा