वर्ष 2018

- रैगिंग को लेकर मेडिकोज पर दो बार जुर्माना लगाया गया

- एक बार पूरे बैच पर एक-एक हजार का जुर्माना लगा

- एक दूसरे मामले में 13 सीनियर्स पर पांच-पांच हजार का जुर्माना

वर्ष 2017

- फोन से रैगिंग करने पर पूरे बैच पर पांच-पांच सौ का जुर्माना

- केजीएमयू में रैगिंग की शिकायतों पर सख्त एक्शन हुए लेकिन रैगिंग रुकी नहीं

LUCKNOW:केजीएमयू में रैगिंग का यह कोई पहला मामला मामला नहीं है, इससे पहले भी इस तरह के मामले यहां आते रहे हैं। जिन पर केजीएमयू प्रशासन ने एक्शन भी लिया, लेकिन मेडिकोज पर इसका कोई असर नहीं हुआ। यही कारण है कि यहां रैगिंग बदस्तूर जारी है।

पूरे बैच पर लगा था जुर्माना

दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने पिछले साल मेडिकोज के साथ हो रही रैगिंग का खुलासा किया था। हॉस्टल में मोबाइल के जरिए रैगिंग की जा रही थी। आलम यह था कि रात 8 बजे के बाद मोबाइल रिंग होने पर मेडिकोज दहशत में आ जाते थे। चीफ प्रॉक्टर की ओर से गठित कमेटी की जांच के बाद केजीएमयू प्रशासन ने पूरे 2017 बैच पर ही एक-एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। साथ ही वार्निग दी थी कि आगे कोई भी रैगिंग करते मिला तो उसे कोर्स से बाहर कर दिया जाएगा।

दहशत से ठोकते थे सलाम

डीजे आईनेक्स्ट ने पिछले वर्ष इसका भी खुलासा किया था सीनियर्स की दहशत के चलते मेडिकोज क्लास से हास्टल आते और जाते समय किस तरह उन्हें सलाम करते हैं। रैगिंग की भाषा में इसे नाइंटी मारना कहते हैं। अगर कोई जूनियर सीनियर को सलाम नहीं करता है तो उसे प्रताडि़त किया जाता था। इस मामले भी भी पूरे बैच पर जुर्माना लगाया गया था।

खिड़की नं.-16 की दहशत

रैगिंग रोकने के लिए केजीएमयू प्रशासन तो सख्त है लेकिन वह इसे इसलिए नहीं रोक पा रहा है क्योंकि रैगिंग करने वाले इसके नए-नए तरीके निकाल लेते हैं। 2018 में हमने खुलासा किया था कि किस तरह वीडियो कॉलिंग से सीनियर जूनियर से मनमाना काम कराते थे। इस पूरे काम के लिए खिड़की नंबर 16 का यूज सीनियर्स कर रहे थे। मामले की जांच के बाद 13 दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया था। केजीएमयू की ओर से इस तरह की कार्रवाई के बाद भी रैगिंग की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।

कोट

कैंपस में रैगिंग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पहले भी जो दोषी पाया गया है, उस पर एक्शन लिया गया है। इस मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लिया जाएगा।

प्रो। आरएएस कुशवाहा

चीफ प्रॉक्टर, केजीएमयू