PATNA: पटना में सुसाइड के मामले में तेजी से बढ़ रहे हैं. एक के बाद एक घटनाएं समाज में बढ़ती निराशावादी सोच का खुलासा कर रही है. बीते शनिवार को दो महिलाओं ने फंदे से लटककर जान दे दी है. इसके पूर्व कई बड़े अफसरों के सुसाइड ने भी खतरे की घंटी बजाई. सवाल ये है कि मामले तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं और अधिकतर युवा ही क्यों मौत की राह चुन रहे हैं. ऐसे सवालों को लेकर जब पड़ताल की गई तो जो मामला सामने आया वह हारमोन से जुड़ा है. दिमाग में दो ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जिनके अनबैलेंस होने पर नकारात्मक सोच आती है और लोग सुसाइड का निर्णय ले लेते हैं.

दिल्ली में 11 मौत का मामला भी जुड़ा

मनो चिकित्सकों का कहना है कि सीजोफीनिया ऐसी बीमारी है जिससे ग्रसित होने के बाद लोगों को उनके ऊपर कोई शक्ति का वास है और वह इच्छा शक्ति से जो चाहें वह कर सकते हैं. ऐसे बीमार लोग परिवार के अन्य लोगों को भी अपनी जाल में फंसा लेते हैं और वह जैसा चाहते हैं वैसा ही परिवार के सदस्य भी करते हैं. दिल्ली में एक ही परिवार में 11 लोगों के सुसाइड के मामले में भी ऐसी ही कुछ बीमारी की बात कही जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि 11 लोगों की मौत के पीछे भी मोक्ष की बात कही जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि मोक्ष मिलने और शरीर पर कोई शक्ति होने के ख्याल सीजोफीनिया के कारण ही होते हैं.

मनोरोग से

होता है डिप्रेशन

डॉक्टरों का कहना है कि मनोरोग से लोग डिप्रेशन में आते हैं और इसके बाद बीमार के अंदर निगेटिव विचार बढ़ जाते हैं. ऐसे लोग आगे चलकर कोई न कोई ऐसी परेशानी से घिर जाते हैं जिसका हल ढूढ़ने के बजाए सुसाइड कर लेते हैं. केरल निवासी अरूण बाबू की पत्‍‌नी जीजी अरूण और प्रयास भारती की कोऑर्डिनेटर स्मृति साह की सुसाइड को भी मनोरोग का बड़ा कारण माना जा रहा है.

सेरोटोनीन डोपामीन से बिगड़ता है मूड

डॉक्टरों का कहना है कि सेरोटोनीन डोपामीन ऐसे हारमोन है जिससे इंसान का मूड बदलता है. इसके अनबैलेंस होने से खुशी भी गम जैसी लगती है. डॉक्टरों का कहना है कि यह मूड और सोच का निर्धारण करता है. इसके अनबैलेंस होने से उदासी होती है और इंसान कोई भी गलत कदम उठा लेता है. पटना में इसके अनबैलेंस के मामले अधिक हैं. मनोचिकित्सकों का कहना है कि सुसाइड के पीछे सेरोटोनीन डोपामीन के अनबैंलेंस का बड़ा रोल है और पटना में स्थित सेंटरों में ऐसे मरीजों की संख्या भी हमेशा अधिक रहती है.

सेरोटोनीन डोपामीन मूड और सोच निर्धारित करता है. इसके अनबैलेंस होने से ही लोगों का मूड ऑफ होता है और अवसाद का कारण भी यही है. ऐसे लोगों एकांत अधिक पसंद करते है. अगर समय पर काउंसलिंग हो जाए तो उन्हें बचाया जा सकता है.

डॉ विवेक विशाल, निदेशक

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