- नए साल पर भीषण जाम में फंसे कानपुराइट्स, घूमने निकले शहरियों को दिन भर मिली जाम की 'सजा'

- साउथ सिटी से शहर तक जाम, टै्रफिक पुलिस बेबस, एंबुलेंस फंसने से बिगड़ी मरीजों की हालत

kanpur : कानपुराइट्स को न्यू ईयर सेलीब्रेशन के लिए टयूजडे को घर से निकलना काफी 'महंगा' पड़ गया. सुबह से ही कानपुराइट्स जाम में फंसे. शाम होने तक सड़क पर हालात और बदतर हो गए. मेन रोड्स और चौराहों पर लंबे-लंबे जाम में फंस कर कानपुराइट्स ने घंटो का वक्त बर्बाद किया. एक तरफ जहां कानपुराइट्स जाम से जूझ रहे थे वहीं चौराहों से ट्रैफिक पुलिस नजर नहीं आई. इस जाम के बीच दैनिक जागरण आई नेस्क्ट के चार रिर्पोटर्स ने शहर का जायजा लिया. जिन रोड और चौराहों से गुजरने में आम दिनों में चार-पांच मिनट्स का समय लगता है. वहां लोगों को घंटो फंसे हुए देखा. आपको बताते हैं शहर के पांच प्रमुख जगहों पर आंखों देखा जाम का हाल..

1. अंकित शुक्ला

वीआईपी रोड- 55 िमनट फंसे

मेघदूत तिराहे से स्टॉक एक्सचेंज चौराहे तक आम दिनों में इस रास्ते से गुजरने में 15 से 20 मिनट लग जाते हैं, लेकिन टयूजडे शाम 5.30 बजे इस दूरी को कार से तय करने में 55 मिनट का वक्त लगा. इस दौरान कहीं भी ट्रैफिक पुलिस या पुलिस जाम खुलवाते नहीं दिखी. अलबत्ता कचहरी से निकले कई प्रशासनिक अधिकारियों की गाडि़यां भी इस जाम में फंस दिखीं. वहीं दो एंबुलेंस भी जाम में फंसी दिखीं. जोकि इस जाम से निकलने की जद्दोजेहाद करती दिखीं, लेकिन उनके सामने कोई रास्ता नहीं था. मैंने एक एंबुलेंस को बड़ी मुश्किल से निकलवाया, इस दौरान कुछ लोगों से कहासुनी भी हुई. उसमें कल्याणपुर के रहने वाले विकास सिंह थे जिनको की हार्ट अटैक पड़ा था. जैसे ही एंबुलेंस निकली वो सरपट करते हुए चली गई. ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी जिंदगी सलामत हो, क्योंकि इतना पूछने का टाइम नहीं मिला कि वो कौन से हॉस्पिटल जा रहे हैं.

कुशाग्र पांडेय

मोतीझील- 46 िमनट फंसे

न्यू ईयर का पहला दिन होने की वजह से मोतीझील में सुबह से ही 'मेले' जैसा हाल था. कानपुर कॉलिंग पर कानपुराइट्स ने शिकायत की कि यहां का हाल बहुत बुरा है. ऐसे में मौके पर जाकर दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने स्थिति का जायजा लिया. मोतीझील में जापानी गार्डेन, तुलसी उपवन में जबरदस्त भीड़ की वजह से पूरा सिस्टम ध्वस्त दिखा. वहां लोगों की रिक्वेस्ट पर पास में खड़ी डायल-100 को रिपोर्टर ने बताया. सिपाही एक्टिव हुए और स्थित कुछ ठीक हुई. यही हाल जीटीरोड की तरफ जहां दक्षिणेश्वर मंदिर में दर्शन करने को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ से जाम लगा था. वहीं शिवाजी चौक से लेकर मेडिकल कॉलेज पुल तक जाम में लोग तो फंसे ही बल्कि कई एंबुलेंस भी फंसी रही. आम तौर पर शिवाजी चौक से हैलट पुल तक पहुंचने में 5 मिनट से भी कम वक्त लगता है लेकिन टयूजडे शाम को 46 मिनट लग गए.

प्रश्ांत द्विवेदी

फजलगंज चौराहा- 60 मिनट फंसे

साउथ सिटी से आने वाले वाहनों की बात हो या फिर कालपी रोड का ट्रैफिक मेडिकल कॉलेज पुल से लेकर मरियमपुर चौराहे और फजलगंज चौराहे तक जाम के हालात बहुत खराब थे. यहां मौजूद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट रिपोर्टर को गोविंदपुरी पुल उतरते ही जाम मिला. फजलगंज से मरियमपुर चौराहा और मेडिकल कॉलेज पुल होते हुए हैलट की तरफ जाने में 1 घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया. आम दिनों में इस रास्ते पर 15 मिनट तक का समय लगता है लेकिन गोविंदपुरी पुल से पहले फजलगंज चौराहे पर भारी जाम से जूझते हुए लोगों को निकलने में करीब एक घंटा यानी 60 मिनट लग गए. रिपोर्टर को पूरी 'यात्रा' के दौरान फजलगंज चौराहे पर बेबस होमगार्ड ट्रैफिक को संभालते जरूर दिखे.

रवि पाल

बड़ा चौराहा- 58 िमनट फंसे

आईटीएमएस सिस्टम से लैस बड़े चौराहे पर पूरा सिस्टम ही ध्वस्त दिखा. यहां ट्रैफिक पुलिस के सिपाही जाम खुलवाते तो दिखे, लेकिन मेस्टनरोड, कचहरी, परेड की तरफ से ट्रैफिक के हैवी लोड के बीच वह असहाय हो गए. जेडस्क्वॉयर माल में जाने के लिए भारी भीड़ के साथ आटो व प्राइवेट बसों ने हालात और खराब कर दिया. बड़े चौराहे से परेड चौराहे, लालइमली चौराहे तक कानपुराइट्स को भीषण जाम से जूझना पड़ा. आम दिनों में इस रास्ते से गुजरने में 15 से 20 मिनट का वक्त लगता है,वहीं टयूजडे शाम को 58 मिनट का समय लगा.

यहां बिगड़े जाम से हालात-

टाटमिल चौराहे से झकरकटी पुल होते हुए अफीमकोठी चौराहे तक, जरीबचौकी चौराहे पर, स्वरूप नगर, रावतपुर, कल्याणपुर- पनकी रोड, चावला मार्केट चौराहे से नंदलाल चौराहा के बीच, मेस्टनरोड,मूलगंज, बिरहाना रोड, नरौना चौराहे पर.

पब्लिक वर्जन

- हम शाम को अपने परिवार के साथ न्यू इयर इंज्वॉय करने के लिए निकले. लेकिन, जाम के कारण बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा और घर पर ही केक काट कर न्यू इयर मनाया.

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- मैं बच्चों के साथ न्यू ईयर मनाने के लिए शाम को सिविल लाइंस स्थित अपने ऑफिस से निकला. लेकिन, रास्ते में लगे भीषण जाम में इस कदर उलझ गया कि घंटों बाद घर पहुंच सका.

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- शहर में जाम की हालत तो आम हो चुकी है. अव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहे ट्रैफिक पर कोई अंकुश नहीं है. जिसका जैसा मन आता है, वैसा करता है. कभी भी कहीं भी वाहनों को खड़ा कर जाम लगा दिया जाता है.

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- पहला दिन ही इतना बुरा गया कि अब पूरा साल जाम का झाम ही लोगों को झेलना होगा. सड़कों पर भीड़ बढ़ते ही जाम लगने लगता है. ऐसे में प्रशासन को एक प्लान तैयार करना होगा, जिससे नागरिकों को इस समस्या से बचाया जा सके.