क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : सदर हॉस्पिटल के सुपरस्पेशियलिटी बिल्डिंग में नवजातों का और बेहतर इलाज हो सकेगा. अब बच्चों को फोटोथेरेपी की जरूरत पड़ने पर रिम्स अथवा दूसरे हॉस्पिटल की दौड़ लगाने की जरूरत नहीं होगी. हॉस्पिटल के पेडियाट्रिक वार्ड में पांच फोटोथेरेपी मशीन लगाई गई है. ऐसे में जन्म लेने वाले कमजोर नवजातों की यहां वार्मर से सेकाई की जा सकेगी. सदर में फोटोथेरेपी मशीन इंस्टॉल हो जाने से रिम्स के पेडियाट्रिक डिपार्टमेंट पर दबाव कम होगा.

बेड पर लगाने की सुविधा

सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग के पेडियाट्रिक वार्ड में 5 फोटोथेरेपी मशीन इंस्टॉल की गई है. इसमें दो स्टेबल और तीन पोर्टेबल मशीन है. इन पांचों फोटोथेरेपी मशीन से बच्चों की अब सेकाई की जा रही है. पोर्टेबल मशीन का सबसे बड़ा फायदा है कि इसे बच्चे के बेड में भी आसानी से लगाया जा सकता है. ऐसे में नवजात को बेड से वार्मर में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

रिम्स में एक मशीन पर रखे जाते हैं तीन बच्चे

रिम्स के पेडियाट्रिक वार्ड में फोटोथेरेपी मशीन तो लगी हुई है, लेकिन जरूरत के हिसाब से ये काफी कम पड़ रही हैं. जितने बच्चों का यहां इलाज होता है, उसकी आधी से भी कम मशीनें यहां हैं. ऐसे में अक्सर एक मशीन पर तीन-तीन बच्चों की थेरेपी की जाती है. इतना ही नहीं, कई बच्चों का समय पर थेरेपी भी नहीं हो पाता है. जबकि, प्राइवेट हॉस्पिटलों में थेरेपी के लिए बच्चे के परिजनों से हर दिन के हिसाब से हजारों रुपए वसूले जाते हैं.