वन विभाग का दावा, गत अभियानों में सफल रहा पौधरोपण

गत दिनों हुए सर्वे के दौरान टीम को 40 फीसदी पौधे भी नहीं मिले

MEERUT। वन विभाग ने दावा किया है कि बीते दशक में 15 लाख से ज्यादा पौधों को रोपा गया है। जिसमें से 80 फीसदी पौधे जीवित हैं और हरियाली में अपना योगदान दे रहे हैं। हालांकि, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आंकड़ें वन विभाग के दावों को चुनौती दे रहे हैं।

80 फीसद पौधे सुरक्षित

प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी अदिति शर्मा ने बताया कि गत पांच वर्ष में 10 लाख से ज्यादा पौधे मेरठ में रोपे गए हैं। इतना ही नहीं विभाग का दावा है कि 80 फीसदी पौधे सुरक्षित हैं। वन विभाग के अलावा मेरठ विकास प्राधिकरण ने शहर मे बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया है। हालांकि गत दिनों हुए सर्वे के दौरान टीम को 40 फीसदी पौधे भी नहीं मिले। नगर क्षेत्र में पौधरोपण अभियान फ्लॉप रहा है, यहां ज्यादातर पौधे पौधरोपण के साथ ही सूख गए हैं। हालांकि सेंचुरी एरिया में वन्य क्षेत्र में बड़ा विस्तार किया गया है।

विकसित की ग्रीन बेल्ट

वन विभाग ने मेरठ में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 2012 से 2016 तक 29 ग्रीन बेल्ट विकसित की। 161.3 हेक्टेअर क्षेत्रफल में ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में 1,03,835 पौधे लगाए हैं। वर्ष 2017 में 6 नई ग्रीन बेल्ट विकसित की गई। जिनमें 27.6 हेक्टेअर क्षेत्रफल में 17,250 पौधे लगाए गए। इनमें पीपल, पिलखन, जामुन, नीम एवं शीशम के पौधे रोपे गए। गत वर्षो में वन विभाग ने 35 साइट्स पर पौधारोपण किया। इसमें कैंपा निधि से भी 11 स्थानों पर पौधे लगाए गए। हर पेड़ का रिकार्ड रखने के साथ ही इसे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया को पौधरोपण की जियो टैंगिंग कर सेटेलाइट मॉनिटरिंग करनी थी, हालांकि यह योजना अभी परवान नहीं चढ़ सकी है।

यह है तस्वीर

2559 - वर्ग किमी कुल वन क्षेत्र

00 - वर्ग किमी अति घना वन क्षेत्र

34 - वर्ग किमी मध्यम घना वन क्षेत्र

34 - वर्ग किमी खुला वनावरण

68 - वर्ग किमी कुल क्षेत्र

2.66 - फीसद कुल वन क्षेत्रफल

7.25 - फीसद प्रदेश का वन क्षेत्रफल

फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में मेरठ में वनावरण 2.55 से बढ़कर 2.66 फीसदी हो गया। गत बरसों में रोपे गए पौधों के थालों की मॉनिटरिंग हो रही है। करीब 80 फीसदी पौधे जीवित हैं। जियो टैगिंग से मॉनिटरिंग का कार्य प्रक्रिया में शामिल है। ग्रीन बेल्ट से लेकर अन्य साइटों पर लगाए गए पौधों की पड़ताल की जा रही है।

अदिति शर्मा, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी