- दो कमरों के पुर्दिलपुर प्राथमिक विद्यालय में पकाया जाता है पांच स्कूल्स का मिड डे मील

- क्लास संचालन में होती है दिक्कत, दो टीचर्स के भरोसे 127 बच्चों की पढ़ाई

GORAKHPUR: शहर के कई प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल स्कूल का दर्जा तो मिल गया है लेकिन हालात देहात के स्कूल्स से भी बदतर हैं. पुर्दिलपुर प्राथमिक विद्यालय का ही हाल देख लीजिए. खुद नगर शिक्षा अधिकारी द्वारा गोद लिए स्कूल का हाल ये कि मात्र दो कमरे के स्कूल में आसपास के चार अन्य प्राथमिक विद्यालयों का मिड डे मील पकाया जाता है. बची-खुची जगह में दो टीचर्स के भरोसे किसी तरह 127 बच्चों की पढ़ाई हो पा रही है. अन्य व्यवस्थाओं का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है. जिम्मेदारों की अनदेखी के बीच यहां की बुनियादी सुविधाएं एक निजी संस्था के भरोसे चल रही हैं. समस्याएं सुलझाने के लिए टीचर्स कई बार जिम्मेदरों से गुहार लगा चुकी हैं लेकिन हर बार महज आश्वासन के कुछ नहीं मिला.

खाना बनवाएं या चलाएं क्लास

पुर्दिलपुर प्राथमिक विद्यालय को मॉडल स्कूल का दर्जा मिला हुआ है लेकिन व्यवस्था के नाम पर जिम्मेदारों ने इस स्कूल को कुछ भी देना गंवारा नहीं समझा. हाल ये कि यहां की टीचर्स स्कूल के रंग रोगन से लेकर टॉयलेट व बच्चों के खेलने के लिए झूले आदि की व्यवस्था अपना गोरखपुर नामक संस्था की मदद से करती हैं. हैरानी तो ये कि नगर शिक्षा अधिकारी द्वारा गोद लिए जाने के बावजूद स्कूल को विभाग द्वारा कोई सुविधा नहीं दी जा रही. मात्र दो कमरे के विद्यालय में 127 बच्चे पढ़ते हैं. टीचर्स स्नेहलता व शिखा सिंह ने बताया कि प्रधानाध्यापिका सुधा पाठक व सहायक अध्यापक फातिमा खातून लंबे समय से छुट्टी पर हैं इसलिए सिर्फ वे दोनों किसी तरह इतने जयादा छात्रों की पढ़ाई का काम मैनेज कर रही हैं. ऊपर से यहीं चार अन्य प्राथमिक विद्यालयों का मिड डे मील बनने से दिक्कत और बढ़ जाती है. पहले से ही जगह का अभाव है, ऊपर से बार-बार खाने की तैयारी देखनी पड़ती है. इससे क्लास संचालन में दिक्कत होती है. क्लासेज बढ़ाने के लिए अधिकारियों स कई बार गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन कुछ नहीं हो सका.

एनजीओ दे रहा संसाधन

विभाग के जिम्मेदारों की अनदेखी के बीच एक एनजीओ इस स्कूल के लिए आशा की किरण बनकर सामने आया है. अपना गोरखपुर नामक संस्था स्कूल को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराती रहती है. संस्था के नितिन जायसवाल बताते हैं कि संस्था की तरफ से स्कूल में दो साल से मॉडल स्कूल का गेटअप दिया जा रहा है. स्कूल में बच्चों के खेलने के लिए जहां झूले, स्लाइडर लगाए गए हैं. वहीं कंप्यूटर के जरिए बच्चों को हाईटेक किया जा रहा है. यही नहीं, शुद्ध पेयजल के लिए पानी की टंकी व मोटर तक लगाए गए हैं लेकिन विभाग की तरफ से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है जिससे की स्कूल को अपग्रेड किया जा सके.

इन स्कूलों के लिए यहां बनता है मिड डे मील

प्राथमिक विद्यालय पुर्दिलपुर, प्राथमिक विद्यालय जटाशंकर, प्राथमिक विद्यालय जटेपुर, प्राथमिक विद्यालय हजारीपुर व पूर्व माध्यमिक विद्यालय, हजारीपुर

क्लास बच्चों की संख्या

एक 33

दो 27

तीन 30

चार 16

पांच 21

कुल 127

वर्जन

मेरा गोद लिया हुआ स्कूल है. बच्चों को बेहतर सुविधा मिल सके, इसके लिए पूरा ख्याल रखा जा रहा है. रहा सवाल पांच स्कूलों के भोजन बनने का तो उन स्कूलों में भोजन बनने की जगह नहीं है जिस कारण यहां यह व्यवस्था की गई है.

- ब्रह्मचारी शर्मा, नगर शिक्षा अधिकारी