हज़ारे ने 21 सितंबर को प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर भ्रष्टाचार विरोधी अपने अभियान के कई अहम पहलुओं की ओर उनका ध्यान खींचा था. इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने सोमवार को हज़ारे को पत्र लिखा जो मंगलवार को सार्वजनिक किया गया.

प्रधानमंत्री डॉक्टर सिंह ने पत्र में लिखा है, "जैसा कि आप जानते हैं कि हम एक सशक्त लोकपाल क़ानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में हम इसमें सफल हो जाएँगे. तथापि हमारी सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने और शासन में सुधार लाने के लिए एक व्यापक एजेंडा पर भी काम कर रही है."

पत्र के अनुसार, "इसमें कई क़ानूनी, कार्यकारी और तकनीकी पहलुओं को शामिल किया जाएगा. लोकपाल की स्थापना इस व्यापक एजेंडा का ही एक हिस्सा है."

दरअसल पिछले हफ़्ते अन्ना हज़ारे ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अगर शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक पारित नहीं हुआ तो वह कांग्रेस प्रत्याशियों के विरुद्ध प्रचार करेंगे. इसमें पहला चुनाव हिसार का हो रहा है और टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने वहाँ पर कांग्रेस प्रत्याशी के विरोध में प्रचार किया है.

चिट्ठियों का दौर

डॉक्टर सिंह ने चिट्ठी लिखकर कहा, "हमारी सरकार चुनाव सुधारों से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर भी सक्रियता से विचार कर रही है. जिन अनेक प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है उनमें से 'राइट टू रिजेक्ट' के प्रस्ताव का आपने उल्लेख किया है."

मगर प्रधानमंत्री का कहना है कि इस बारे में अभी चर्चा ज़रूरी है, "एक लोकतांत्रिक समाज में कुछ मुद्दों पर राजनीतिक सहमति ज़रूरी होती है. हम चुनाव सुधारों के कई प्रस्तावों पर सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा करना चाहते हैं और उन प्रस्तावों पर आगे कार्रवाई करना चाहते हैं जिन पर मोटे तौर पर सहमति बनती है."

इससे पहले अन्ना के कांग्रेस विरोध पर पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने अन्ना को एक खुली चिट्ठी लिखकर कहा कि अगर उनकी ख़्वाहिश राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने की है तो वे इसमें खुलकर हिस्सा लें.

दिग्विजय सिंह का ख़त उनके इस आरोप के ठीक बाद आया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अन्ना हज़ारे को भारतीय जनता पार्टी की ओर से राष्ट्रपति बनाए जाने का भरोसा दिलाया गया है.

साथ ही उन्होंने ये भी लिखा है कि अन्ना हज़ारे को कांग्रेस विरोधी लोगों ने घेर रखा है. दिग्विजय ने आरोप लगाया है कि अन्ना की टीम में शामिल शांति भूषण, प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल उनका इस्तेमाल अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए कर रहे हैं.

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