-अकाउंट धारक को एटीएम के साथ मिला था 50 हजार का इंश्योरेंस

-बैंक का तर्क 60-90 दिन के अंदर करना होता है क्लेम के लिए अप्लाई

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BAREILLY : पीएनबी अकाउंट धारक की मौत के बाद एटीएम कार्ड का मिलने वाला इंश्योरेंस क्लेम देने में आनाकानी करना बैंक को महंगा पड़ गया. नॉमिनी ने मामले को लेकर कंज्यूमर फोरम फ‌र्स्ट में वाद दायर कर दिया. जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बैंक पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने बैंक को आदेश दिया कि वह पीडि़त को 45 दिन के अंदर जुर्माना राशि का भुगतान कर दे. अन्यथा उसे 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा.

बैंक ने खारिज किया था दावा

बिहार गोपालगंज निवासी दीपक कुमार मिश्रा बहेड़ी नगर पालिका कम्पाउंड में रहकर जॉब करते थे. उन्होंने अपना अकाउंट बहेड़ी की पंजाब नेशनल बैंक में खुलवाया था, जिसके एटीएम कार्ड के साथ में मिले पेपर पर 50 हजार का दुर्घटना बीमा देने की बात भी लिखी हुई थी. दीपक कुमार मिश्रा किसी काम से 22 जनवरी 2016 को ऊधम सिंह नगर जा रहे थे. रास्ते में सड़क दुर्घटना में वह घायल हो गए. इलाज के दौरान ऊधम सिंह नगर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई. पुलिस ने इसकी एफआईआर दर्ज कर 23 जनवरी को पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया. परिजन शव का अंतिम संस्कार को पैतृक गांव ले गए. वहां से 2 जून 2016 को उनका बेटा और परिजन वापस आए और कमरे को तलाशा. एटीएम कार्ड मिलने के बाद मृतक के बेटे ने इंश्योरेंस क्लेम के लिए पीएनबी में दावा पेश किया लेकिन बैंक ने दावा समय निकलने की बात कहते हुए खारिज कर दिया. बैंक ने बताया कि दावा 60 दिन के अंदर करना हाेता है.

नोटिस में क्लेम की बात स्वीकारी

बैंक से क्लेम का दावा खाजिर होने पर पीडि़त ने वकील के माध्यम से बैंक को नोटिस भेजा और लिखा कि दावा करने का समय 90 दिन वेबसाइट पर है, लेकिन उसका घर दूर था इसीलिए दावा 132 दिन पर किया. जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए. बैंक ने एटीएम पर 50 हजार रुपए क्लेम मिलने की बात तो स्वीकारी, लेकिन पीडि़ता का दावा खारिज कर दिया. जिस पर पीडि़त ने कंज्यूमर फोरम में वाद दायर कर दिया. जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए एटीएम के साथ दिए पेपर्स देखे जिस पर लिखा था कि क्लेम के लिए 90-150 दिन के अंदर का नियम है. इसके बाद कोर्ट ने माना कि अकाउंट धारक की मौत के बाद परिवार बिहार चला गया जो दूर है इसीलिए उसे बैंक में क्लेम के लिए अप्लाई करने में देरी हुई. इसीलिए इस मामले में बैंक क्लेम खारिज नहीं कर सकता, वहीं क्लेम का दावा पेश करने में देरी के लिए पीडि़त भी दोषी है. इसीलिए कोर्ट ने बैंक को आदेश दिया कि पीडि़त 50 हजार की जगह 25 हजार रुपए पाने का अधिकारी है. बैंक ने पीडि़त का क्लेम खाजिर कर उपभोक्ता सेवा प्रदान करने में गलती की है. कोर्ट ने जुर्माना राशि को 45 दिन के अंदर भुगतान करने का भी आदेश दिया है.

एटीएम कार्ड धारक का दुर्घटना बीमा होता है, लेकिन इसके लिए क्राइटेरिया होता है. दुर्घटना के बाद नॉमिनी को बैंक में क्लेम के लिए दावा करना होता है और बैंक क्लेम दे देता है. क्लेम देने में कोई बैंक मना नहीं करता है.

ओपी बढ़ेरा, बीओबी लीड बैंक मैनेजर

सभी एटीएम कार्ड पर अलग-अलग इंश्योरेंश है. रुपए कार्ड पर अलग और मास्टर कार्ड पर अलग दुर्घटना क्लेम राशि दी जाती है. कार्ड यूज नहीं करने पर क्लेम खत्म हो जाता है.

वैभव, ब्रांच मैनेजर पीएनबी