सस्ते के चक्कर में फल-फूल रहा जहर का कारोबार

नींद की गोलियां मिलाकर बढ़ाया जाता है शराब का नशा

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MEERUT : थोड़े रुपये, कम समय और ज्यादा नशा. इसी फार्मूले के चलते लोग देशी शराब की आड़ में जहरीली शराब का सेवन कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं. ठेकों पर मिलने वाली देसी शराब कच्ची शराब के मुकाबले न सिर्फ महंगी होती है, बल्कि उसका नशा भी देर से चढ़कर जल्दी उतर जाता है.


ऐसे बनता है जहर

यह जहरीली शराब जानलेवा केमिकल से तैयार की जाती है. कच्ची शराब को माफिया जंगलों व खेतों में भट्ठियां लगाकर तैयार करते हैं. जिला आबकारी आलोक कुमार ने बताया कि छानबीन में निकल कर आया है कि शराब माफिया नीम की पत्ती, बेशरम का पत्ता, गुड़ का शीरा आदि मिलाकर इसे सड़ाने को जमीन में गाड़ देते हैं. करीब 10-15 दिन में यह सड़ जाता है तो इसे निकालकर भट्ठी में पकाया जाता है.


मिलाते हैं मिथाइल

इसके बाद शुरू होता है तैयार शराब को नशीला बनाने का खेल. इसके लिए मिथाइल मिलाया जाता है. यदि मिथाइल नहीं मिला तो नौसादर, यूरिया और वा¨शग पाउडर मिलाकर शराब तैयार की जाती है. शराब को अधिक नशीला बनाने के लिए एलप्रेक्स समेत अन्य नशीली गोलियों का घोल भी मिलाया जाता है. इस मिश्रण को भट्ठी में उबालते समय जो भाप निकलती है, उसे एक पाइप के जरिए एकत्र करते हैं, जो कच्ची शराब होती है.


ड्राई फ्रूट और फल भी

पहले कच्ची शराब साधारण तरीके से बनाई जाती थी. लेकिन अब ड्राई फ्रूट और फल से स्पेशल कच्ची शराब तैयार करके उसे भी नशीला करने को जहर मिलाया जा रहा है. फलों से देसी शराब बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के फलों को एक साथ मिलाया जाता है. जहां कच्ची शराब का रेट 80 से 100 रुपये प्रति बोतल होता है, वहीं फलों व ड्राई फ्रूट से तैयार स्पेशल शराब 200 से 250 रुपए प्रति बोतल बिकती है.


जान का खतरा

मेडिकल कालेज के डॉ. एसपी सिंह कहना है कि सामान्य शराब में इथाइल अल्कोहल होता है, जो जानलेवा नहीं होता. किंतु शराब में मेथेनॉल मिलाने से यह जहर बन जाता है. 15 एमएल से ज्यादा मेथेनॉल शरीर में पहुंचते ही केमिकल रिएक्शन शुरू कर देता है. यह तेजी से फार्मिक एसिड बनाने लगता है. इससे शरीर का मेटाबोलिज्म टूट जाता है. सबसे पहले एल्कोहलिक रेटिनोपैथी से आंख की रोशनी जाती है. रक्त में अम्ल घुलने से ब्रेन, किडनी, हार्ट एवं लंग्स सभी खराब होने लगते हैं. खून में आक्सीजन खत्म हो जाती है और ब्लडप्रेशर बैठ जाने से मरीज की मौत हो जाती है.


खतरनाक हैं ये पदाथर्

नौसादर : कॉपर सल्फेट नाम से जाना जाता है. इससे चर्म रोग हाे जाता है.

नाइट्राबेट व डायजापाम : नींद की दवा है, आंख व दिमाग को क्षति पहुंचाती है.

मिथाइल : घातक अम्ल है. इसके प्रयोग से जान को खतरा.

यूरिया : खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है. धीमे जहर का काम करती है.