AGRA (15 March): कहते हैं कि कानून के हाथ लम्बे होते हैं, लेकिन आगरा पुलिस के साथ ऐसा नहीं है. यहां पुलिस के हाथ कानून से लम्बे हैं. आगरा पुलिस की कार्य करने की अपनी प्रणाली है. पिछले कई महीनों से लम्बित पड़ी चार्जशीट को अभी तक कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया है. नियमानुसार पुलिस को किसी मामले में 90 दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करनी पड़ती है. समय से चार्जशीट न दाखिल होने पर आरोपी अपनी जमानत कराने में सफल हो जाते हैं.

रिपोर्ट 24 घंटे में कोर्ट में देना जरूरी

थाने पर हर रोज जो मुकदमें दर्ज किए जाते हैं, उन सभी की रिपोर्ट प्रतिदिन कोर्ट को भेजनी पड़ती है. नियमानुसार कितनी भी देरी होने पर दर्ज एफआईआर को 24 घंटे में कोर्ट में दाखिल करना पड़ता है. रिपोर्ट सर्किल के सीओ के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत होनी चाहिए, लेकिन यहां तो सीधे एसओ व इंस्पेक्टर अपने स्तर से मनमाने तरीके से कोर्ट में रिपोर्ट भेजते हैं, जबकि कोर्ट में रिपोर्ट सीओ के ऑ?जर्व करने के बाद ही में भेजी जानी चाहिए.

पुलिसकर्मी नहीं दिखाते रुचि

एफआईआर ही नहीं, अगर पुलिस किसी भी मामले में व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, तो उसकी सूचना सम्बन्धित कोर्ट को देना आवश्यक होता है. आमतौर पर पुलिस इन कायदा-कानूनों का अनुपालन करने में ज्यादा रुचि नहीं लेती. कई दिनों तक पुलिस एफआईआर की सूचना समय से देने में आनाकानी करती है.

कोर्ट की सख्ती भी रही बेअसर

पिछले दिनों कोर्ट में मुल्जिम और चार्जशीट पेश करने को लेकर कई बार कोर्ट ने एसएसपी व डीजीपी को पत्र भी लिखे हैं. आखिर में कोर्ट सम्बन्धित दारोगा व इंस्पेक्टर के खिलाफ 350 सीआरपीसी में कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश जारी कर देता है. कोर्ट की इस सख्ती के बाद भी पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई खासा बदलाव नहीं आया है.