- पुलिस सत्यापन को खुद देनी होगी अपने थाने की रिपोर्ट

- बढ़ते क्राइम को देखते हुए किया गया फॉर्मेट चेंज

देहरादून: पुलिस मुख्यालय ने राज्य में निवास करने वाले अन्य प्रदेश के नागरिकों की पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में बदलाव किया है. अब सत्यापन में आधार और मूल निवास के थाने की रिपोर्ट भी देनी होगी. यह काम सत्यापन कराने वाले को खुद करना होगा. इसे लेकर पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को सर्कुलर जारी किया है.

रिपोर्ट में देनी होंगी अहम जानकारियां

अभी तक सत्यापन के नाम पर औपचारिक रूप से पुलिस फार्म भरने के बाद सत्यापन सेल में जमा करा देती थी. फार्म में सत्यापन कराने वाले व्यक्ति या फिर मकान मालिक के आधार पर सूचनाएं दर्ज होती थीं. पहचान के नाम पर वोटर कार्ड, मकान मालिक का पहचान पत्र, प्रधान का प्रमाणपत्र आदि दिए जाते थे. मगर, तेजी से बढ़ रहे क्राइम को देखते हुए पीएचक्यू ने इसमें व्यापक संशोधन कर दिया है. इस संबंध में एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर)अशोक कुमार ने सभी जिलों को वेरिफिकेशन कराने के लिए नया फॉर्मेट जारी किया है. इसमें वेरिफिकेशन कराने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड और उसके गांव और कस्बे के थाने की रिपोर्ट भी अनिवार्य कर दी गई है. यह रिपोर्ट पुलिस नहीं, बल्कि संबंधित व्यक्ति स्वयं जमा कराएगा. रिपोर्ट में थाने का पता, बेस और मोबाइल फोन नंबर, थानेदार का नाम, नंबर और जनपद के एसएसपी का नाम और फोन नंबर भी देना होगा. रिपोर्ट जमा करने के बाद पुलिस इसकी क्रॉस चेकिंग करेगी.

नेपाल समेत राज्यों को भेजे पत्र

सत्यापन अभियान में पड़ोसी देश नेपाल को विशेष पत्र भेजा गया है. नेपाली दूतावास से लेकर गृह मंत्रालय को पीएचक्यू ने पत्र भेजकर भारत आने वाले नागरिकों के सत्यापन में सहयोग की अपेक्षा की है. इसी तरह बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तरप्रदेश को पत्र भेजकर सत्यापन में आने वाली दिक्कतों से अवगत कराया है.

वेरिफिकेशन की पुरानी प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. इससे वेरिफिकेशन कराने वाले की जिम्मेदारी बढ़ेगी. साथ ही पुलिस का काम आसान होगा. इस संबंध में सभी जिलों को नए फॉर्मेट पर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

- अशोक कुमार, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर)