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LUCKNOW : लखनऊ में विवेक तिवारी हत्याकांड में दो सिपाहियों को बर्खास्त कर जेल भेजने के बाद से प्रदेश भर के सिपाहियों में आक्रोश है। काली पट्टी बांधना, सोशल मीडिया पर पोस्ट और आरोपी सिपाही की पत्नी के अकाउंट में पैसे भेजकर वे खुलकर अपना विरोध जता चुके हैं। मुख्यमंत्री और अफसरों के कड़े रुख के बाद पुलिस कर्मी बाहर से तो शांत तो हो गए है, लेकिन अंदर ही अंदर 'विद्रोह की आग' सुलग रही है। पुलिसकर्मी बड़ा आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मंशा आईपीएस की तरह पुलिस यूनियन बनाने की है। सिपाहियों ने 24 सूत्रीय मांगपत्र बना कर इसकी शुरुआत भी कर दी है। सिपाही एक दूसरे को मांगपत्र भेजकर समर्थन मांग रहे हैं। जिसमें उनको अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। अगर ये पुलिसकर्मी अपनी रणनीति में कामयाब हुए तो सरकार को 21 अक्टूबर के बाद बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है। जिससे सूबे का लॉ एंड आर्डर बिगडऩे का भी खतरा है।

दोस्तों, परिजनों की आईडी से

काली पट्टी बांधकर विरोध करने पर हुई कार्रवाई से सचेत सिपाही अब सोशल मीडिया का सहारा लेकर मांगपत्र वायरल कर रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर और वाट्सएप जरिए मांगपत्र को पूरे प्रदेश के सिपाहियों के पास भेजा जा रहा है। अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए सिपाही खुद के बजाय परिजनों और दोस्तों की आईडी से मांगपत्र भेज रहे हैं। मांग पत्र में लिखा है कि 21 अक्टूबर को पुलिस शहीद दिवस मनाए जाने के बाद रणनीति उजागर की जाएगी। इसके बाद समस्या का समाधान नहीं हुआ तो निर्णायक आंदोलन होगा। चुनाव नजदीक होने के कारण पुलिसकर्मियों
के 'विद्रोह की आग' सरकार व प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

खुफिया, एलआईयू को लगाया

पुलिस अफसरों को सिपाहियों के इस मांग पत्र की भनक लग गई है। जिससे वे डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। खुफिया और एलआईयू को एक्टिव कर विरोध की आग को हवा देने वाले सिपाहियों को चिंहित करने का काम शुरू हो गया है। इसके लिए उन्होंने खुफिया और एलआईयू को लगाया है, लेकिन उनको अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है।

पुलिसकर्मियों की ये है 24 सूत्रीय मांग
*  वेतन विसंगति दूर किया जाए, आठ घंटे ड्यूटी निर्धारित की जाए
*  ओवर टाइम का पैसा और राज्यकर्मियों की तरह अवकाश मिले
*  अवकाश के दिन ड्यूटी पर बुलाए जाने पर अतिरिक्त पैसा दिया जाए
*  प्रत्येक पुलिसकर्मी की आकस्मिक छुट्टी निर्धारित की जाए
*  पदोन्नति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
*  आईपीएस की तरह समयानुसार प्रमोशन दिया जाए। जिससे सिपाही भी राजपत्रित अधिकारी बन सके
*  विभागीय परीक्षा के जरिए प्रमोशन और पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए
*  एनपीएस खाते को जीपीएफ में परिवर्तित किया जाए
* चिकित्सा प्रतिपूर्ति इलाज के दौरान या 3 महीने के अंदर प्रदान किया जाए
* टीए डीए का भुगतान अनिवार्य किया जाए, पौष्टिक आहार भत्ता 5 हजार किया जाए
* साइकिल की जगह बाइक भत्ता मिल
* पुलिस कर्मियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए माडर्न पुलिस स्कूल की स्थापना हो
*  अन्य रोजगार नियुक्ति पर पुलिसकर्मी या उनके पाल्यों को विशेष आरक्षण हो
* अराजपत्रित कर्मियों की ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर परिवार के सदस्य को योग्यता के आधार पर नौकरी और आश्रित को असाधारण पेंशन अनिवार्य किया जाए
* थाना स्तर पर महिला सिपाहियों को रहने के लिए आवास दिया जाए
* तकनीकी शाखा व कानून व्यवस्था एवं विवेचना का अलग अलग किया जाए
* पुलिस रेगुलेशन 1851 में बदलाव किया जाए
* निलंबन और बर्खास्तगी के पूर्व जांच आवंटन अनिवार्य किया जाए।
* आईपीएस की तरह पुलिस यूनियन या संगठन को मान्यता दी जाए

पुलिसकर्मियों की दिक्कतों से सभी अधिकारी अवगत हैं। उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए सभी तरह के उचित कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन पुलिस की नौकरी में अनुशासन बहुत जरूरी होता है ऐसे में अगर कोई इसकी अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अविनाश चंद्र, एडीजी, कानपुर जोन

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