आगरा. सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है. दहशत के चलते लोग पलायन को मजबूर हैं. इस सबसे बेफिक्र पुलिस नींद में है. शमसाबाद रोड, चमरौली स्थित पावन धाम कॉलोनिवासियों द्वारा पलायन करने की चेतावनी से प्रशासन में खलबली मच गई. मामला दो संप्रदाय से जुड़ा देख पुलिस तैनात कर दी गई, जिससे कोई भी अप्रिय घटना रोकी जा सके. लेकिन, सतर्क रहने की बजाय पुलिसकर्मी यहां खर्राटे भरते रहते हैं.

तनाव में भी सोती पुलिस

पावन धाम कॉलोनी में विवाद करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर है, जो गैर समुदाय पक्ष वक्फ बोर्ड की बताता है. जबकि एरिया में रहने वाले लोग उसे फर्जी बताते हैं. गैर समुदाय पक्ष का कहना है कि वह जमीन पर पिछले 40 साल से रह रहे हैं. मात्र दो परिवार वहां पर रहते हैं, जो 100 परिवारों पर भारी कैसे पड़ सकते हैं. इनका आरोप है कि यहां के लोग उन्हें निकालना चाहते हैं. क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है. फोर्स तैनात है, लेकिन पुलिसकर्मी खर्राटे भरते रहते हैं. इससे कभी भी टकराव की स्थिति बन सकती है.

खराब करते हैं माहौल

क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि यहां पर उर्स आदि मौकों पर बाहर से लड़के आते हैं, जो माहौल खराब करते हैं. यहां पर दुकानें सज जाती हैं. लड़कियों और महिलाओं का घर से निकलना दूभर हो जाता है. इसके चलते लोग इनका विरोध करते हैं. लोगों का कहना था कि गैर समुदाय के लोगों ने कब्जा कर रखा है.

रात में गाडि़यों से आए थे लोग

लोगों का कहना था कि वह मकान बेचकर पलायन करने को मजबूर हैं. शुक्रवार को विवाद होने के बाद वहां पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया. इसके बाद भी रात में गाडि़यों में भरकर गैरसमुदाय के लोग आए थे, लेकिन पुलिस को देख कर कुछ नहीं बोले.

दो से अधिक हैं परिवार

एरिया के लोगों का कहना था कि यहां पर दो परिवार नहीं उससे अधिक हैं. दो परिवार मात्र यहां पर हैं, लेकिन चमरौली में इनके बहुत से परिवार हैं, जो मौका पड़ने पर यहां पर आ जाते हैं. पहले पूरा एरिया चमरौली में आता था. लेकिन नई कॉलोनी बनने के बाद नाम पावन धाम कॉलोनी रख दिया गया.

जमीन पर कब्जा कर रखा है

जमीन भगवान दास पाठक की बताई गई है. गैर समुदाय लोगों का कहना था कि भगवान दास ने जमीन दान में सैयद के लिए दी थी, जबकि भगवान दास का कहना था कि उनकी जमीन पर कब्जा किया गया है. पहले सैयद खेत की मेड़ पर बनी थी. उस दौरान लोग वहां पर कार्यक्रम किया करते थे. लेकिन अब कॉलोनी बन गई. इसके बाद भी लोगों ने कब्जा नहीं छोड़ा. उनका कहना था कि वह पुलिस को मालिकाना हक के कागज दिखाएंगे.

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गाय को लेकर हुआ था विवाद शुरु

मीरा देवी का कहना था कि 40 साल से उनकी गाय वहां पर बंधती रही है. अगस्त 2017 में गाय के पैर में कील ठोंक दी. इसके बाद विवाद हुआ, तो मीरा देवी का सिर फोड़ दिया. यहां से विवाद की शुरुआत हुई थी.