-शहर में 24 घंटे बिजली देने का वादा साबित हो रहा गलत

-उपभोक्ताओं के लिए ट्रिपिंग बनी मुसीबत, 24 घंटे में 240 मिनट गुल रह रही बिजली

न शट डाउन न कटौती फिर भी शहर में बिजली आंख मिचौली का खेल खेल रही है. 24 घंटे में 24 बार पावर का 10 से 15 मिनट का कट लग रहा है. ऐसा तब हो रहा है जबकि सरकार ने शहर को 24 घंटे बिजली देने का वादा किया है. अगर ऐसे ही बिजली की सप्लाई होती है तो यह वादा खोखला है. यह हम नहीं शहर के उपभोक्ता कह रहे हैं. भीषण गर्मी से हर कोई बेहाल है. ऐसे में अगर बिजली भी ठीक से न मिले तो लोगों का क्या हाल होगा समझा जा सकता है. उधर पीवीवीएनएल के अधिकारियों की दलील है कि ऐसा किसी फीडर से नहीं बल्कि ट्रांसफॉर्मर व एमसीबी से हो रहा है. यदि किसी एरिया में बिजली जा रही है तो वह लोकल फॉल्ट या ओवरलोड का कारण भी हो सकता है.

24 घंटे में 24 बार कट

हर एक घंटे में बिजली गुल होने की परेशानी बनारस के लगभग हर एरिया में बनी हुई है. इससे न सिर्फ लोगों का कामकाज प्रभावित हो रहा है बल्कि उनकी नींद भी पूरी नहीं हो रही है. सबसे ज्यादा परेशानी रात में बढ़ रही है. अचानक पावर कट होने पर नींद टूट जा रही है. उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें पावर सप्लाई तो 24 घंटे है, लेकिन विभाग की ओर से हर एक घंटे पर पावर पर ब्रेक लग रहा है. जो कभी 10 मिनट का तो कभी 15 मिनट का है. सीधे तौर पर कहें तो विभाग के पास सप्लाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं है जिसकी वजह से लगातार बिजली की कटौती न कर टुकड़ों में किया जा रहा है.

ट्रिपिंग के नाम पर कटौती

विभागीय सूत्रों की मानें तो कहने को उपभोक्ताओं को डिमांड के मुताबिक बिजली सप्लाई दी जा रही है. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. शहर में अभी भी कभी लोकल फॉल्ट तो कभी आईपीडीएस, डिस्मेंटलिंग के नाम पर कटौती हो रही है. इधर विभाग प्रशासनिक अधिकारियों से यह कहकर अपनी पीठ थपथपा रहा है कि 24 घंटे सप्लाई दी जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में हालत तो और भी खराब है. वहां तो लगातार चार-चार घंटे की अघोषित कटौती की जा रही है.

ओवरलोड से गिर रही एमसीबी

अधिकारियों का कहना है गर्मी की वजह से डिस्ट्रिक्ट में बिजली की मांग बढ़ गई है. इन दिनों ज्यादातर उपभोक्ताओं के घरों में एसी, फ्रीज व कूलर का यूज हो रहा है. इसकी वजह से ट्रांसफॉर्मर व गली मुहल्लों में लगे आईपीडीएस जंक्शन बॉक्स के एमसीबी में प्रॉब्लम आ जा रही है. जिन इलाकों में जंक्शन बॉक्स लगा है वहां लोड ज्यादा है. ऐसे में जैसे ही बॉक्स पर लोड पड़ रहा है वैसे ही एमसीबी गिर जा रही है. कंम्प्लेन होने पर 10 मिनट में उसे ठीक कर दिया जाता है.

एक नजर

700

मेगावाट बिजली की जिले में रोजाना हो रही खपत

450

मेगावॉट शहरी क्षेत्र में

250

मेगावॉट ग्रामीण क्षेत्रों में

400

मेगावाट की खपत पीक ऑवर में

300

सामान्य समय में

एक-एक घंटे में पावर कट फीडर से नहीं हो रहा है. यह एरिया वाइज प्रॉब्लम आ रही है. कई इलाकों में आईपीडीएस के लगे जंक्शन बॉक्स के एमसीबी लोड न उठा पाने की वजह से गिर जा रहे हैं. इसलिए इसे चेंज कर बड़ा बॉक्स लगाया जाएगा.

जीवन प्रकाश, एक्सईएन, खण्ड-1

सिस्टम मेंटेन करने के लिए समय की जरूरत होती है. लोड इतना बढ़ चुका है कि थोड़ी बहुत कटौती करना मजबूरी है.

ई खान, एसई (ट्रांसमीटर) पीवीवीएनएल

नो ट्रिपिंग का मतलब ये नहीं होता है कि लाइन ट्रिप नहीं करेगी. यह ट्रिपिंग को कंट्रोल करता है. अगर फिर भी ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है तो इसकी जांच कराई जाएगी.

आशीष अस्थाना, एसई, पीवीवीएनएल