-शहर के सभी डिवीजनों में एनर्जी ऑडिट कराने के लिए लगेंगे डिवाइस

-मुख्यालय में बैठे अधिकारियों को आसानी से मिल जाएगी रिपोर्ट

किस पॉवर स्टेशन पर कितनी बिजली आपूर्ति हो रही है. सब स्टेशन को कितने घंटे सप्लाई दी गयी. अगर बिजली आपूर्ति कम ज्यादा होती है तो वजह क्या थी. इन सब की निगरानी करने के लिए पॉवर कारपोरेशन ने आनलाइन आडिट सिस्टम डेवलप करने का प्लान तैयार किया है. पावर कारपोरेशन के चेयरमैन आलोक कुमार के निर्देश पर शहरी इलाके के सभी विद्युत नगरीय वितरण खंड में एनर्जी ऑडिट करने का फैसला लिया है. इसके लिए फीडरों में रिमोट सिस्टम डिवाइस लगाए जाएंगे.

यह मिलेगी जानकारी

सब स्टेशनों से निकलने वाले फीडरों में रिमोट सिस्टम डिवाइस (मॉडम) लगाई जाएगी. इससे किस फीडर से डिस्टीब्यूर्ट्स,ट्रांसफार्मर को कितने घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है की डिटेल मिलेगी. यही नहीं ट्रांसफॉर्मर पर आपूर्ति का कितना लोड है, कितनी देर तक आपूर्ति बाधित रही व कितनी आपूर्ति की मांग बढ़ी है, इन सब की भी सटीक जानकारी मिलेगी. इसके अलावा किस फीडर से कितनी लाइन लॉस हो रही उसका हिसाब भी आसानी से मिल जाएगा.

क्या होना है

एनर्जी ऑडिट के लिए सब स्टेशनों से 11केवी और 33केवी लाइन फीडर में रिमोट सिस्टम डिवाइस लगाना है, इसका डिटेल कलेक्ट करने के लिए सर्वे का काम शुरु हो चुका है. इसी बीच विभागीय अधिकारी कौन सा फीडर कितने केवी लाइन का है, इसका भी डिटेल जुटाएंगे. इस काम को पूरा करने के लिए एक महीने की समय सीमा तय की गई है. इसी बीच एनर्जी आडिट के लिए डिवाइस भी इंस्टाल की जाएगी. कारपोरेशन के तहत शहर के एक छोर पर स्थित सब स्टेशन हो या दूसरे छोर पर सब स्टेशन की बिजली सप्लाई के हिसाब से उसकी खपत और उसके सापेक्ष मांग तक का हर मिनट का हिसाब रखा जाएगा.

मुख्यालय के अधिकरियों को मिलेगी जानकारी

फीडरों में रिमोट सिस्टम डिवाइस लगने के बाद मिनट से लेकर प्रति घंटे किस फीडर से कितनी आपूर्ति हो रही है और कितनी खपत बढ़ गई है, इन सब की जानकारी पावर डाटा कलेक्शन सेंटर नोएडा से लेकर लखनऊ तक में बैठे आला अधिकारियों को मिलनी शुरू हो जाएगी. गाजियाबाद व लखनऊ जैसे बड़े शहरों में यह व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है.जहां आपूर्ति संबंधित जानकारी अधिकारियों को मिलती रहती है.

चेयरमैन के निर्देश पर एनर्जी ऑडिट के लिए मॉडम लगाने की दिशा में तैयारियां चल रही है. बहुत जल्द है यह व्यवस्था लागू हो जाएगी.

राकेश सिन्हा, पीआरओ, पीवीवीएलएल