- जिला महिला अस्पताल में भर्ती माया की दर्दनाक कहानी

- बेहोशी का फायदा उठा सामान लूट ट्रैक पर फेंक गए थे साथी यात्री

GORAKHPUR: जिला अस्पताल में भर्ती माया अमानवीयता की जिंदा तस्वीर है. नौ माह की गर्भवती माया सोमवार रात गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर बेहोश पड़ी मिली थी. गश्त पर निकले पुलिस कर्मचारी उस तक पहुंचे तो महिला के साथ नवजात भी ट्रैक पर ही पड़ा था. आनन-फानन में जिला महिला अस्पताल पहुंचाई गई माया ने होश आने पर जो बयां किया उसे सुन यहां भर्ती मरीज और तीमारदारों की आंखें नम हो जा रही हैं. दो दिन के बेटे के साथ माया अपनों के होते हुए भी यहां लावारिस की तरह पड़ी है. हद तो ये कि प्रसव पीड़ा से जूझती बेबस महिला की मदद करने की जगह साथी यात्रियों ने ही उसे लूट ट्रैक पर फेंक दिया था.

छूट गया पति का साथ

मुंगई में दो साल की उम्र में अनाथ हुई माया अब 25 वर्ष की है. मां को आग लगाने के बाद पिता ने आत्महत्या की तो वह अनाथालय पहुंच गई. वहां 12वीं तक पढ़ाई के बाद नर्सिग के लिए परीक्षा देती रही. इसी बीच उसकी जिंदगी में प्रदीप आया. अनाथालय की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रदीप ने उसकी मांग भरी तो बरसों से उदास माया की जिंदगी में भी रंग भर गए. लेकिन उसके साथ वह बस्ती स्थित ससुराल पहुंची ही कि जिंदगी में एक बार फिर भूचाल आ गया. चार साल पहले प्रदीप को छोड़ गई उसकी पहली पत्नी राधिका ने उस पर केस दर्ज करा दिया. प्रदीप जेल चला गया मगर तब तक माया गर्भवती हो चुकी थी.

महिलाओं ने दे दिया ट्रेन से धक्का

पति प्रदीप के प्यार को सच्चा बताने वाली माया ससुराल में रहते हुए उसकी रिहाई की दुआएं करने लगी. साथ ही वह स्टाफ नर्स की भर्ती के लिए तैयारी भी कर रही थी. इसी की परीक्षा देने नौ माह का गर्भ लिए सात नवंबर को मुंबई गई. वहां से लौटते समय ट्रेन में प्रसव पीड़ा शुरू हो गई जिससे वह बेहोश हो गई. माया बताती है कि इसका फायदा उठाकर किसी ने उसकी बाली, पायल आदि जेवर के साथ पांच हजार रुपए निकाल लिए. हद तो ये कि जिस बोगी में वह बैठी थी उसमें सवार कुछ महिलाओं ने भी सहयोग करने के बजाए ट्रेन से धक्का दे दिया. वह ट्रैक पर ही पड़ी तेज दर्द से कराहती रही और वहीं बच्चे को जन्म दे दिया.

पुलिसवालों ने बचाई जान

स्टेशन के पास ट्रैक पर वह बेहोश हाल पड़ी रही. इस बीच गश्त कर रहे पुलिस कर्मियों की नजर उस पर पड़ी. एक नवजात उसके बगल में पड़ा था जिसकी नाल भी नहीं कटी थी. पुलिस कर्मियों ने आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाकर उसे जिला महिला अस्पताल पहुंचाया जहां अभी उसका इलाज जारी है. उधर, ससुराल में मौजूद रिश्तेदार भी किसी पचड़े में न पड़ने की सोचकर उससे दूरी बनाए हुए हैं.

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अन्य मरीजों के तीमारदार बने सहारा

कोतवाली थाना क्षेत्र के मेवातीपुर के रहने वाले मिर्जा जाकिर बेग भी अनाथ माया की कहानी सुन मदद को आगे आए. इस बीच कुछ और तीमारदारों ने माया के दर्द को समझते हुए हाथ बढ़ाया. माया के पास दवा तक के पैसे नहीं थे. उसकी कहानी सुनने के बाद सभी ने उसकी मदद की. ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्से भी उसकी भरपूर मदद में जुटी हैं.

जच्चा-बच्चा सुरक्षित

जिला महिला अस्पताल के सामान्य सर्जिकल वार्ड में माया भर्ती है जहां उसका इलाज चल रहा है. इस बीच जच्चा और बच्चा दोनों खतरे से बाहर हैं. डॉक्टर और स्टाफ समय-समय से उनका हेल्थ चेकअप कर रहे हैं.

वर्जन

मीटिंग के सिलसिले में बाहर हूं लेकिन अस्पताल स्टाफ को माया के अच्छे इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. उसके इलाज में किसी तरह की कोई कमी नहीं होगी.

- डॉ. डीके सोनकर, एसआईसी, जिला महिला अस्पताल