- एक्ट के मुताबिक नहीं बल्कि आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक होगी कार्रवाई

- केंद्र सरकार के बचाव में सफाई देने उतरे एससी आयोग के अध्यक्ष

आगरा. एससी-एसटी एक्ट पर अध्यादेश से भाजपा सरकार बैकफुट पर है. हाल ही में सवर्णो के भारत बंद ने उसकी चिंता और बढ़ा दी है. डर है कि कहीं आगामी लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा न भुगतना पड़े. इससे बचाव के प्रयास में सरकार जुट गई है. इसके लिए मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से खुद एसएसी आयोग अध्यक्ष ने मोर्चा संभाला. सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कोई बदलाव नहीं किया है. बल्कि पूर्व की स्थिति ही है. उन्होंने आज जन को भरोसा दिलाया है कि बगैर जांच के किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी.

दहेज एक्ट से की तुलना

डॉ. कठेरिया ने कहा कि एससी एसटी एक्ट से घातक दहेज एक्ट है. दहेज एक्ट में सर्वाधिक मुकदमें दर्ज होते हैं. इस पर पत्रकारों ने सवाल किया कि दहेज एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी नहीं है, लेकिन एससी एसटी एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है. इस एक्ट में भी जांच के उपरांत ही गिरफ्तारी है. इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं. फिर उनसे सवाल किया कि अगर जांच के उपरांत ही गिरफ्तारी है तो फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश क्यों लेकर आई. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी यही आदेश दिए थे कि बगैर जांच के मुकदमा दर्ज न हो और न ही गिरफ्तारी हो. इस सवाल का उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. और नसीहत देने लगे.

फर्जी मुकदमों के पीछे नॉन एससी खड़ा होता है

उन्होंने कहा कि उनकी अधिकारियों के साथ बैठक हुई है, जिसमें अधिकारियों ने बताया गया है कि वर्ष 2018 में करीब 15 हजार मुकदमें दर्ज हुए हैं, जिनमें से 150 मुकदमें एससी एसटी एक्ट के मुकदमें दर्ज हुए हैं. 44 में एफआर लगी है, 12 एक्सपंज हुए हैं और 50 प्रतिशत में गिरफ्तारी नहीं हुई है. उन्होंने आगे कहा कि एससी एसटी एक्ट के पीछे सवर्ण समाज के लोग होते हैं. वे ही लोग आपसी दुश्मनी के चलते इस एक्ट का इस्तेमाल कराते हैं.

मैं लेता हूं जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि बगैर जांच के किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी. इसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बगैर जांच पड़ताल के किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी.

एक्ट का नहीं अध्यक्ष चलेगा कानून

एससी एसटी एक्ट में जो प्रावधान हैं सो हैं, लेकिन एससी आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बगैर जांच के किसी के भी विरुद्ध मुकदमा दर्ज न किया जाए, अगर किया गया तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. इससे तो ये ही जाहिर होता है कि एक्ट के प्रावधानों से नहीं बल्कि आयोग के अध्यक्ष के हिसाब से ही मुकदमा दर्ज होगा.