- शहर में सरकारी अस्पतालों के बाहर एक्टिव रहते हैं प्राइवेट एंबुलेंस संचालक

- मरीजों को बरगलाकर ले जाते हैं प्राइवेट हॉस्पिटल

- कमीशन के चक्कर में अस्पताल कर्मी भी करते हैं मदद

GORAKHPUR: सरकारी चिकित्सा व्यवस्था के लचर हाल का फायदा उठा प्राइवेट एंबुलेंस वाले सिटी में लोगों को ठग रहे हैं. प्राइवेट हॉस्पिटल्स के एंबुलेंस चालक जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल तक के बाहर एक्टिव रहते हैं, जो दूरदराज से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बरगलाकर प्राइवेट हॉस्पिटल का रास्ता दिखा देते हैं. सूत्रों की मानें तो इस खेल में जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं जो कमीशन के चक्कर में मौका देख मरीजों को इन एंबुलेंस संचालकों के हवाले कर देते हैं. वहीं, स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार हैं कि इस बारे में जानते हुए भी खामोश बैठे हैं.

कर देते हैं तीमारदारों का ब्रेनवॉश

जिले में त्वरित सेवाओं के लिए 108 नंबर की 30 एंबुलेंस रन कर रही हैं. इसके अलावा महिलाओं के लिए 102 नंबर की 50 और एएलएस की दो एंबुलेंस चलाई जा रही हैं. 19 ब्लॉक क्षेत्रों के लिहाज से जिले में कुल 82 एंबुलेंस उपलब्ध हैं जिनकी सेवाएं नि:शुल्क हैं. बावजूद इसके लोग प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों के जाल में फंसकर ठगी का शिकार बन रहे हैं. सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल में काम करने वाले प्राइवेट कर्मी और इन एंबुलेंस संचालकों के बीच गठजोड़ है, जो मरीज के साथ आए तीमारदार का ब्रेनवाश कर अच्छे इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल भेज देते हैं. जब तक तीमारदार को ठगे जाने का एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो जाती है. पैसा और समय की बर्बादी होती ही है, मरीज की जान पर भी आफत बन जाती है. इस गोरखधंधे की खबर स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को भी है, लेकिन वे कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं.

एक दिन में निचोड़ लेते हैं पैसे

कुशीनगर जिले के विशनपुर के रहने वाले विनोद बुखार से पीडि़त थे. परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे. लेकिन बीच में ही एक प्राइवेट एंबुलेंस वाले ने रोक लिया. बताया कि यहां आए दिन मारपीट की घटना होती है इसलिए डॉक्टर मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं. प्राइवेट हॉस्पिटल में कम कीमत में अच्छा इलाज मिल जाएगा. तीमारदार उसकी बात में आ गए और मरीज को एंबुलेंस से शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. आरोप है कि उस अस्पताल में एक ही दिन में जांच और दवाओं के नाम पर दस हजार रुपए से अधिक वसूल लिए गए.

प्राइवेट हॉस्पिटल संचालक देते हैं धमकी

खजनी के रहने वाले विनोद की अचानक तबियत खराब हो गई. परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले आए लेकिन बीच में ही एक प्राइवेट एंबुलेंस चालक ने उनका रास्ता रोक अपने झांसे में ले लिया. इसके बाद एंबुलेंस में बिठाकर एक प्राइवेट नर्सिग होम में भर्ती करवाया. जहां मरीज की जांच और इलाज के नाम पर 12 हजार रुपए ले लिए गए. तीमारदार ने जब आपत्ति जताई तो डॉक्टर उसे धमकी देने लगे.

बॉक्स

नॉर्मल डिलेवरी पर खर्च हो गए डेढ़ लाख

देवरिया की रहने वाली एक महिला को सरकारी अस्पताल से एक प्राइवेट एंबुलेंस चालक ने बेहतर इलाज का भरोसा जता बक्शीपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया. जहां महिला को नार्मल डिलेवरी से बच्चा पैदा हुआ. जब परिजनों को इलाज का बिल मिला तो एक लाख 50 हजार रुपए लिखा था. बिल देख तीमारदार भड़क गए. परिजनों ने संबंधित जिम्मेदारों से मामले की शिकायत की है.

सिटी में प्राइवेट हॉस्पिटल - करीब 500

प्राइवेट एंबुलेंस - करीब 400

वर्जन

मामला मेरे संज्ञान में है. इस संबंध में कई शिकायतें भी मिली हैं. एसएसपी को पत्र लिखकर प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों पर कार्रवाई करने के लिए कहा है. अगर परिसर के आसपास प्राइवेट एंबुलेंस खड़े रहते हैं तो उन्हें हटवाया जाएगा.

- डॉ. आरके गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल