- पहले कार्यकर्ताओं की सुनी बातें फिर प्रियंका ने परखी तैयारियां

- बूथ संख्या पूछने पर टिकट मांगने वाले नेता नहीं दे पाए जवाब

- कई नेताओं ने मुलाकात का मौका न मिलने पर जताया आक्रोश

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LUCKNOW : 'कौन-कौन टिकट चाहता है', प्रियंका गांधी के ये लफ्ज सुनते ही मीटिंग हॉल में मौजूद आधे से ज्यादा कांग्रेसियों ने अपना हाथ खड़ा कर दिया. प्रियंका ने उनकी ओर मुस्करा कर देखा और आगे पूछा कि 'अच्छा अपना बूथ नंबर बताइए', ये सुनते ही सब एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे. इस पर प्रियंका ने फिर कहा कि 'बूथ नंबर पता नहीं, अच्छा ये बताइए कि पिछला पार्टी का कार्यक्रम कब किया था', इस पर कुछ नेताओं ने सकुचाते हुए कहा कि पिछले साल, ज्यादातर कार्यक्रम दिल्ली से आ जाते हैं तो उसमें ही व्यस्तता रहती है. यह सुनकर प्रियंका को थोड़ा अटपटा लगा और उन्होंने सख्त लहजे में कहा, 'क्यों, आपकी जिम्मेदारी क्या है, आपको पदाधिकारी क्यों बनाया गया है'.

पहले दिन ही दिखाए तेवर
यह नजारा था मंगलवार को पार्टी की नई राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी का मोहनलाल गंज संसदीय क्षेत्र के नेताओं से मुलाकात का. राजनीति में अपनी पारी का आगाज करने वाली प्रियंका अपने पुरखों के अनुभव को समेटे नेताओं और कार्यकर्ताओं से रूबरू हुई तो पहले उन्होंने शांत रहकर उनकी पूरी बात सुनी.प्रियंका के यह पूछने पर कि आखिर इतने सालों में लखनऊ में कोई लीडरशिप क्यों नहीं तैयार हो सकी, तमाम नेता जवाब नहीं दे पाए. इस पर प्रियंका ने यह बोलकर उनकी सारी आशंकाओं का उत्तर भी दे दिया कि यदि हम प्रत्याशी चुनेंगे तो क्या आप उसे मिलकर जिताएंगे.

टाइम कम है, चुनाव सामने है
प्रियंका ने बैठक में कहा कि अब समय कम है और चुनाव सामने है. इसलिए फिलहाल संगठन में कोई आमूलचूल परिवर्तन करने की गुंजाइश कम है. मोहनलालगंज से आए एक बुजुर्ग पदाधिकारी प्रियंका के सामने भावुक हो गये. रोते हुए बोले, 'इतने साल से राजनीति में हूं पर किसी बड़े नेता से मिलने का मौका नहीं मिला'. आपने लखनऊ आने के बाद दूसरे दिन ही बुला लिया. इतने सालों की राजनीति में पार्टी ने कभी पार्षदी का टिकट भी नहीं दिया. एयरपोर्ट पर आपने मिलने जाने वालों में वहीं पुराने चेहरे होते हैं. हमें तो पूछा तक नहीं जाता है. यह सुनकर प्रियंका सोचने को मजबूर हो गयी और उन्होंने बुजुर्ग नेता को पानी पिलाने को कहा.

कितने पदाधिकारी हैं कमेटी में
वहीं जब तमाम नेता खुद को पार्टी का महामंत्री बताकर पेश होने लगे तो प्रियंका को मजबूरन यह पूछना पड़ गया कि आखिर कितने लोग पार्टी में महामंत्री हैं. पीसीसी में कितने पदाधिकारी हैं. इस पर किसी ने कहा कि करीब पांच सौ. इस पर प्रियंका बोलीं कि यही हाल अमेठी और रायबरेली का भी था. वहीं बैठक में प्रशांत किशोर की चर्चा भी हुई. कई नेताओं ने कहा कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में तमाम बूथ स्तर की कमेटियां बनाई थी. इस पर प्रियंका ने पूछा कि इसका डाटा कहां है. लोगों ने बताया कि प्रशांत किशोर और एआईसीसी के पूर्व कोऑर्डिनेटर शशांक शुक्ला के पास. प्रियंका ने कहा कि इसके डाटा का बंदोबस्त कीजिए ताकि आगे की तैयारियां की जा सके.

नहीं मिल पाने का दिखा आक्रोश
प्रियंका गांधी से मुलाकात न हो पाने का आक्रोश तमाम नेताओं के चेहरे पर नजर आया नतीजतन पार्टी पदाधिकारियों के साथ उनकी जमकर कहासुनी भी हुई. दरअसल तमाम नेताओं की शिकायत थी कि उनके बजाय दूसरे जिले के नेताओं को प्रियंका गांधी से मिलवाया जा रहा है. यह हाल लखनऊ सीट पर भी देखने को मिला और पार्टी के वरिष्ठ नेता अमरनाथ अग्रवाल, आरपी सिंह, राजेंद्र सिंह गप्पू, मुकेश सिंह चौहान, राजेश शुक्ला आदि उनसे नहीं मिल पाए. हालांकि प्रियंका ने लखनऊ और मोहनलालगंज सीट के नेताओं से करीब डेढ़-डेढ़ घंटे तक चर्चा की जबकि मीटिंग का वक्त 40 मिनट तय किया गया था.

नेताओं से भरवाए फॉर्म
इस दौरान पार्टी नेताओं से एक फार्म भी भरवाया गया जिसमें उनका नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर के अलावा वे ट्विटर और वाट्सएप पर सक्रिय हैं कि नहीं, पूछा गया. साथ ही उनका ट्विटर हैंडिल, पार्टी में वे किस पद पर रहे हैं, कभी चुनाव लड़ा है कि नहीं के अलावा अपनी टिप्पणी भी लिखने का कॉलम दिया गया था. यह फॉर्म प्रियंका से मिलने वाले उन्नाव, सीतापुर, लखनऊ, मोहनलाल गंज, बाराबंकी समेत करीब एक दर्जन जिलों के नेताओं ने भरा.