- संपत्ति कर की राशि नहीं कर रहे जमा

- 60 से अधिक सरकारी भवनों और आवासों में करोड़ों बाकी

आगरा. सरकारी भवनों के प्रापर्टी टैक्स जमा करने में जिम्मेदार अधिकारी हीलाहवाली कर रहे हैं. इससे हर साल नगर निगम को करोड़ों रुपये की चोट पहुंच रही है. 60 से अधिक सरकारी भवनों में 15 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. ये राशि नगर निगम की संपत्तिकर के टारगेट का 50 फीसदी हिस्सा से ज्यादा है. इन विभागों की देनदारी के कारण नगर निगम अपने प्रापर्टी टैक्स के टारगेट में भी पिछड़ रहा है. इससे विकास कार्यो में भी बाधा खड़ी हो रही है.

मानक के अनुसार है टैक्स

नगर निगम की बड़ी आय का साधन संपत्तिकर (प्रापर्टी टैक्स) है. नगर निगम अपनी सीमा के भीतर सभी सरकारी, गैर सरकारी, व्यवसायिक भवनों से तय मानक अनुसार टैक्स वसूलता है. इसमें सरकारी भवन रुकावट पैदा कर रहे हैं. दरअसल ये भवन सालोंसाल से संपत्तिकर की राशि ही जमा नहीं कर रहे हैं. कई भवनों में करोड़ों रुपये का बकाया है. नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक 60 से अधिक सरकारी भवन संपत्तिकर जमा नहीं कर रहे हैं. ये लगभग 15 करोड़ रुपये है.

28 करोड़ है टारगेट

नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में संपत्तिकर वसूलने का लक्ष्य 28 करोड़ रुपये रखा है. अभी तक 25 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं. इन सरकारी भवनों से शत-प्रतिशत वसूली हो जाए, तो टारगेट से ज्यादा वसूली हो जाएगी.

एसएन ने जमा किए 1.12 करोड़

एसएन मेडिकल कॉलेज पर 1 करोड़ 12 लाख 67 हजार 730 रुपये का बकाया था. इस टैक्स को जमा कराने के लिए नगर निगम ने लगातार प्रयास किए. एसएन ने पूरा टैक्स जमा कर दिया. इसी तरह पहली बार पोस्ट ऑफिस समेत अन्य विभागों से संपर्क किया जा रहा है और टैक्स भी जमा होने की उम्मीद जाग रही है.

निगम से भी नहीं हुए प्रयास

नगर निगम की ओर से भी प्रयास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई. विभागों को नोटिस भेजकर अपना पल्ला झाड़ लिया गया. पहली बार सहायक आयुक्त ने सरकारी भवनों की लिस्ट तैयार कराके बकाया राशि वसूलने का अभियान चलाया है. सरकारी भवनों के तालमेल से टैक्स जमा भी हो रहा है.