यूपी बोर्ड के नौ विषयों की अर्हता में बदलाव का प्रस्ताव

टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती पर भी पड़ेगा इन बदलावों का असर

प्रोफेशन कोर्सेज की डिग्रियां भी नियुक्ति में काम आएंगी

इंटरमीडिएट तक के छात्रों की पढ़ाई का दायरा बढ़ेगा

prakashmani.tripathi@inext.co.in

ALLAHABAD: प्रोफेसनल कोर्स और मार्केट व इंडस्ट्रीज की डिमांड पूरी करने के लिए इंट्रोड्यूज किये गये सब्जेक्ट की एक्स्ट्रा डिग्री टीचर बनने के लिए बेकार नहीं रहेगी. यूपी बोर्ड खुद इन कोर्सेज की पढ़ाई इनीशियली स्टेज पर कराने की तैयारी में है. इसका नफा-नुकसान बताते हुए यूपी बोर्ड ने माध्यमिक कॉलेजों में टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती में कई विषयों की अर्हता में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है. इससे बेरोजगारों के साथ छात्रों का भी भला होना है.

डिमांड बदली, पैटर्न जस का तस

पिछले दो दशक में इंडिया में काफी चेंज आया है. इंडस्ट्रीज की डिमांड चेंज हुई है. इसे देखते हुए यूनिवर्सिटीज ने नए प्रोफेशनल कोर्सेज को इंट्रोडयूज किया है. इसमें सर्टिफिकेट लेवल से लेकर डिग्री लेवल के कोर्स शामिल हैं. बाकी स्थानों पर इनकी डिमांड है लेकिन यूपी बोर्ड के कॉलेजेज में इस तरफ के डिग्री धारक रिक्रूटमेंट नहीं पा सकते थे. इसका एक नुकसान प्रोफेशनल डिग्रीधारक बेराजगारों का बढ़ना और दूसरा इंटर तक के छात्रों का इन चेंजेज से महरूम रहना था. इसी के चलते हाईस्कूल व इंटरमीडिएट से लेकर स्नातक तक में विषयों के नाम बदलने और नये-नये पाठ्यक्रमों को शामिल करने का प्लान बनाया गया है. बोर्ड की तरफ से टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती के नौ विषयों की अर्हता बदलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. शासन की मंजूरी के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को दावेदारी का मौका मिलेगा.

मार्च में ही किया था इनीशिएट

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को यूपी बोर्ड की तरफ से नौ जुलाई को पत्र भेजा गया था. इसमें बोर्ड की तरफ से हाईस्कूल स्तर पर जीव विज्ञान, संगीत सहित आठ विषय को बोर्ड की पाठ्यक्रम की सूची से बाहर होने की बात कही गई थी. पत्र मिलने के बाद चयन बोर्ड की तरफ से 2016 विज्ञापन के इन विषयों के पद निरस्त कर दिए हैं. इस कार्रवाई के पहले ही यूपी बोर्ड ने 20 मार्च को शासन को अर्हता में संशोधन के लिए प्रस्ताव भेज दिया, क्योंकि अफसरों को अंदाजा था कि घोषित पद निरस्त होने से अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर सकेंगे. नतीजा होगा कि न छात्र अपग्रेड होंगे और न पढ़ाई. बोर्ड के प्रस्ताव में हाईस्कूल से लेकर स्नातक तक के अद्यतन विषयों को समाहित किया गया है, ताकि अभ्यर्थियों को आवेदन के सदस्य कोई प्राब्लम न हो.

इन विषयों का भेजा प्रस्ताव

इंटरमीडिएट

भौतिक विज्ञान

जीव विज्ञान

कृषि

चित्रकला

संगीत

नृत्य कला

नैतिक शिक्षा

खेल व शारीरिक शिक्षा.

हाईस्कूल

कृषि

चित्रकला

विज्ञान

नैतिक शिक्षा

चित्रकला

संगीत

शारीरिक शिक्षा व खेल

क्या हुआ महत्वपूर्ण बदलाव

इंटर के विषयों में एमएससी और हाईस्कूल में बीएससी व अन्य समकक्ष डिग्रियों को जोड़ा है

ज्यादातर में यही लिखा है कि मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल हो

शारीरिक शिक्षा में बीपीएड, बीपीई आदि जोड़ा गया है

संगीत गायन व वादन में भारतखंडे और प्रयाग संगीत समिति के अलावा कुछ अन्य डिग्रियों को समाहित किया गया है

हाईस्कूल विज्ञान में बढ़े विषय

विज्ञान विषय के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, माइक्रो बायोलॉजी, बायो केमिस्ट्री, बायो टेक्नोलॉजी जैसे नए विषयों को जोड़ा गया है

इनमें से किसी दो विषय से अभ्यर्थी का स्नातक होना अनिवार्य है

पहले केवल भौतिक व रसायन विज्ञान ही रहा है

बोर्ड ने यह शर्त भी लगाई है कि विज्ञापन जारी करते समय पीसीएम यानी भौतिक, रसायन व गणित के साथ ही पीसीबी यानी भौतिक, रसायन व बायोलॉजी का पद भी घोषित करना होगा

अर्हता में संशोधन का प्रस्ताव पहले भेजा जा चुका है. फिर से रिमाइंडर भेजा जा रहा है, जिससे प्रस्ताव को लेकर शीघ्र ही स्थिति स्पष्ट हो सके.

-नीना श्रीवास्तव,

सचिव, यूपी बोर्ड

प्रशिक्षित स्नातक वर्ग में हाईस्कूल के लिए

विषय पद आवेदन कारण

जीव विज्ञान 304 67005 ( विज्ञान को एक विषय कर दिया गया, जिसमें जीव विज्ञान अंश के रूप में समाहित है)

संगीत 22 51 (इसमें संगीत व वादन को अलग-अलग विषय किया गया)

काष्ठ शिल्प 02 20 (हाईस्कूल के पाठ्यक्रम में विषय न होने के कारण)

पुस्तक कला 08 502 (हाईस्कूल के पाठ्यक्रम में विषय न होने के कारण निरस्त किया गया इसके साथ ही चित्रकला के विविध आयाम जोड़ने की तैयारी है)

टंकण 01 18 (हाईस्कूल के पाठ्यक्रम में विषय न होने के कारण)

प्रवक्ता वर्ग इंटरमीडिएट के लिए

विषय पद आवेदन

वनस्पति विज्ञान 02 1702 (वनस्पति विज्ञान को अलग से विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है. )

संगीत 01 11 (संगीत को गायन व वादन में अलग-अलग कर दिया गया है)