- शासन पर लगाया मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप

- कर्मचारियों ने पंचायतीराज निदेशालय में किया विरोध प्रदर्शन

DEHRADUN: अपने आंदोलन की रणनीति के तहत राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने सरकार व शासन पर कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू कर दिया है. गेट मीटिंग के तहत सोमवार को संयुक्त परिषद ने पंचायतीराज निदेशालय में धरना-प्रदर्शन कर विरोध दजर्1 किया.

वेतन समिति भंग करने की मांग

प्रदर्शन करते हुए परिषद ने वेतन समिति को भंग करने और उसकी सिफारिशों को रद करके नए सिरे से वेतन विसंगतियों के निराकरण की मांग की. परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह ने आरोप लगाया कि नई सरकार का छह माह का कार्यकाल पूरा हो चुका है. लेकिन, कर्मचारियों की समस्याओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा, जबकि सातवें वेतनमान के एरियर और भत्तों तक का भुगतान भी नहीं हो पाया है. इसी को देखते हुए अब कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है. जबकि, दो बार परिषद का प्रतिनिधि मंडल सीएम ने मुलाकात कर चुका है. उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने वेतन समिति की कर्मचारी विरोधी रिपोर्ट को भी शत-प्रतिशत स्वीकार कर लिया, जिसमें कई संवर्गो के वेतन में कटौती की गई है. इस मौके पर अंजू बड़ोला, डीएस असवाल, नंद किशोर त्रिपाठी, वीके धस्माना, ओमवीर सिंह सहित सीपी सुयाल आदि कर्मचारी मौजूद रहे.

ये हैं प्रमुख मांगे

-एसीपी की नई व्यवस्था का जीओ निरस्त कर पुरानी व्यवस्था लागू की जाए.

-सातवें वेतनमान के भत्तों व एरियर का भुगतान केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर दिया जाए.

-कर्मचारियों, शिक्षकों व पेंशनर्स के लिए यू-हेल्थ स्मार्ट कार्ड शुरू किया जाए.

-विभागों का एकीकरण कार्मिकों को विश्वास में लेकर ही हो.

-पुलिस कर्मियों के साथ ही राज्य कर्मचारियों को क्ख्00 रुपये वाहन भत्ते के तौर पर मिलें.