- शहर को लगा मानसून का ग्रहण, बाढ़ जैसे हालात

- आधा शहर पानी के आगोश में लोगों में त्राहिमाम

MEERUT: महानगर में इस समय बाढ़ जैसे हालात हैं। शहर तीन दिन की बारिश भी नहीं झेल पाया। मानूसन के आगाज ने शहर की हालत इतनी पतली कर दी कि आधा शहर पानी में डूब गया। शहर के दर्जन भर क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां नाव लगने जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जलभराव की विकट समस्या से जहां शहर में त्राहिमाम है, वहीं नगर निगम के अफसर चादर ओढ़ कर गहरी नींद में सोएं हैं।

वाटर लॉगिंग से डूबा शहर

शहर में वाटर लॉगिंग की समस्या कोई नई बात नहीं है। पिछले बीस सालों से पुराना मेरठ वाटर लॉंिगग की समस्या को झेलता आ रहा है। कुछ इलाकों की तो हालत यह है कि वहां बारह महीनों बरसात जैसे हालात दिखाई देते हैं। इन इलाकों में हल्की सी बारिश भी भयानक स्थिति पैदा कर देती है। यहां के लोगों से बात करें तो बरसात इन लोगों के लिए किसी आफत से कम नहीं। मानसून का नाम लेते यहां के लोग सिहर उठते हैं।

खुली नगर निगम की पोल

वाटर लॉगिंग वाले इन क्षेत्रों में कार्रवाई के नाम पर नगर निगम की ओर से हर बार लिस्ट तो तैयार की जाती है, लेकिन वह लिस्ट फाइलों में ही कैद होकर रह जाती है। विकास के नाम पर इन क्षेत्रों में कोई काम नहीं कराया जाता। नतीजा यह निकलता है कि बरसात आने पर इन क्षेत्रों में नरकीय स्थिति बन जाती है। ऐसा तो तब है जब मानसून के आते ही यहां के लोगों में हलचल शुरू हो जाती है और वो नगर निगम अर्जियां पर अर्जियां लगाते हैं, लेकिन उन अर्जियों को हर बार कूड़े के ढ़ेर में फेंक दिया जाता है।

ब्रह्मापुरी में बाढ़

सबसे बुरे हालात तो ब्रह्मापुरी क्षेत्र के हैं। इस क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात हैं। यहां भगवतपुरा, तारापुरी, बिशनपुरा और शास्त्री भवन के आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। जलभराव की स्थिति यह है कि सड़कों पर तीन-तीन फिट पानी भरा है। पानी की निकासी न होने से सड़कों का पानी बह कर घरों में भर गया है। यहां तक कि इन जलभराव के कारण इन इलाकों में पसरा सन्नाटा देखकर कफ्र्यू जैसे हालात नजर आते हैं।

घरों में कैद हुआ जीवन

सड़क, गली और मोहल्लों में भरे पानी के कारण जन-जीवन रुक गया है। जलभराव से प्रभावित लोग अपने-अपने घरों में कैद हो गए हैं। कुछ लोग शहर में जलभराव का नजारा देखने के लिए मकानों की छत पर जा पहुंचे हैं। बाजार बंद हैं, दुकानें बंद हैं यहां तक कि रोजमर्रा की चहलकदमी को भी जैसे नजर लग गई है।

सिल्ट से अटे पड़े नाले

शहर में नगर निगम के 281 नालें हैं। नगर निगम की ओर से हर साल बरसात से पूर्व इन नालों की सफाई की जाती है। इस बार भी नालों की सफाई को लेकर निगम प्रशासन की ओर से बड़े-बड़े दावें किए थे, लेकिन निगम के दावों की पोल उस समय खुल गई। जब दो दिन पूर्व मानसून ने जनपद में दस्तक दे दी। मानसून की इस पहली बारिश ने न केवल शहर को आइना दिखा दिया, बल्कि नगर निगम की ओर से की गई सारी तैयारियों की पोल पट्टी भी खोल कर रख दी। इस संबंध में जब नगर निगम के रिकॉर्ड खंगाले गए तो परिणाम चौंकाने वाले दिखाई पड़े। नगर निगम की ओर से केवल अभी तक 141 नालों की सफाई कराई गई, जबकि 140 नाले अभी भी कूड़े से अटे पड़े हैं।

तीन हजार सफाई कर्मी

शहर में पसरी गंदगी और अटे पडे़ सौ से अधिक नालों की दुर्दशा का यह आलम तो तब है जब नगर निगम की फौज में तीन हजार से अधिक सफाई कर्मी शामिल हैं। नगर निगम में यदि स्थाई सफाई कर्मचारियों की संख्या 1076 है और संविदा पर काम कर रहे सफाई कर्मचारियों की संख्या 2208 है। बावजूद इसके शहर के नाले कूड़े की मार से दम तोड़ रहे हैं।

नालों की हालत नाजुक

शहर में नगर निगम के कुल 281 नालें हैं, जिनमें से निगम 141 नालों की सफाई पूरी की जाने का दावा कर रहा है। यदि नगर निगम के दावें को भी सच मान लिया जाए तो शहर के 140 नालें आज भी गंदगी की विकट समस्या से जूझ रहे हैं।

नालों की सफाई का कार्य प्रगति पर है। पिछले कई सालों से नालों की सफाई नहीं की गई इस लिए सफाई कार्यो में थोड़ा समय अधिक लग रहा है। अधिकतर नालों की सफाई पूरी करा ली गई है। कुछ दिनों में सफाई कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

-डॉ। प्रेम सिंह, नगर स्वास्थ अधिकारी

शहर में वाटर लॉंिगग की समस्या गंभीर बात है। इस संबंध में विशेष टीम का गठन कर सर्वे कराया जाएगा। निगम बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रख ऐसे इलाकों की समस्या के निस्तारण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

-हरिकांत अहलूवालिया, मेयर

डूब गए ये इलाके

लिसाड़ी रोड, नूर नगर, श्यामनगर, अहमद नगर, ब्रह्मापुरी, घंटाघर, बागपत रोड, मुल्तान नगर, जाग्रति विहार सैक्टर चार, रौनकपुरा आदि।