-पार्टी में सम्मान न मिलने से खफा होकर समर्थकों के साथ दिया इस्तीफा

BAREILLY: लोकसभा चुनाव से पहले सपा को एक बड़ा झटका लगा है. पूर्व राज्यसभा सदस्य और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने वेडनसडे पार्टी से किनारा कर लिया है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने 50 समर्थकों के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान किया. उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को त्याग पत्र भेज दिया है. उनके साथ पार्टी छोड़ने वालों में उनके समधी महिपाल सिंह यादव के अलावा 3 जिला पंचायत सदस्य व 3 ग्राम प्रधान भी हैं. वीरपाल ने पार्टी से सम्मान न मिलने और खजुरिया-उमरिया प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद पार्टी की ओर से सहयोग न मिलना वजह बताई है. हालांकि अभी उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया कि वह किसी पार्टी से जुड़ेंगे, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि वह शिवपाल यादव के समाजवादी सेक्युलर मोर्चा में जा सकते हैं.

लंबे समय से चल रही अनबन

वीरपाल सिंह सपा के 21 साल जिलाध्यक्ष रहे हैं. वह सपा के शुरुआती दिनों से जुड़े हुए हैं. इसके चलते वह मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव के करीबी माने जाते थे लेकिन जब से उन्हें जिलाध्यक्ष के पद से हटाया गया, तब से विरोध के स्वर चल रहे थे. वह इससे पहले जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा भी भेज चुके थे लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था. सपा के पार्टी कार्यालय को लेकर भी उनकी वर्तमान जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव से अनबन हो चुकी है. पुराने लीडर्स और नए लीडर्स के बीच की अनबन काफी समय से चल रही है, जिसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में भी देखने काे मिला था.

पार्टी सिद्धांतों से भटक गई है

वीरपाल ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखा है जिसमें लिखा है कि मैं वीरपाल सिंह यादव पूर्व सांसद राज्यसभा सपा की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे रहा हूं. जिसे स्वीकार करने की कृपा करें. उन्होंने लिखा है कि मुलायम सिंह यादव ने जिन सिद्धांतों को लेकर पार्टी बनाई थी उससे पार्टी भटक गई है. हम लोगों का इरादा सदा ही साम्प्रदायिकता व सरकार की गलत नीतियों का विरोध पुरजोर तरीके से करने की आदत थी, उसका लेकर हम लोग जेल जाने से नहीं डरते थे. अपनी सही बात बड़ी निडरता से कहते थे खासकर अल्पसंख्यकों और कमजोर तबकों के साथ हर हालत में खड़े होते थे.

कांवडि़यों को लेकर विवादित बोल जारी

उन्होंने लिखा कि लगभग 20 महीनों से बीजेपी की षडयंत्रकारी साजिशों का हम लोग विरोध नहीं कर पाए हैं. बरेली डिस्ट्रिक्ट में पिछले 2 महीनों में बीजेपी वर्कर्स ने भगवा धारण कर कांवडि़या बनकर एक वर्ग के लोगों को ही नहीं बल्कि आमजनों के साथ भी बदसलूकी की. खैलम और उमरिया में जमकर उत्पात किया, कोई भी पार्टी नेता पीडि़तों का हाल तक लेने नहीं गया. इंतजार करके मैं स्वयं उमरिया गया, वहां बातचीत में मैनें कांवडि़यों की हकीकत बयां की तो मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई लेकिन पार्टी के किसी पदाधिकारी ने मेरा पक्ष करना तो दूर मुझे फोन तक नहीं किया. जबकि यह लड़ाई मैं पार्टी के लोगों के लिए लड़ रहा था. जब मुझे साम्प्रदायिकता के खिलाफ ही पार्टी का सहयोग नहीं मिलेगा तो मैं पार्टी में रहकर क्या करूंगा. मैने साम्प्रदायिकता के खिलाफ जंग का ऐलान किया है. मैं पीछे नहीं हटूंगा, चाहें मुझे जेल जाना पड़े, चाहें जान तक की कुर्बानी देनी पड़े, मैं कदम पीछे नहीं हटाऊंगा.

झूठे हैं वीरपाल के आरोप

वहीं जब इस मामले में सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव से बात की तो उन्होंने कहा कि वीरपाल सिंह यादव के आरोप झूठे हैं. जब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी तो पार्टी उनके साथ खड़ी थी. भगवत शरण गंगवार ने उनके साथ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और पार्टी वर्कर्स के साथ जेल जाने की बात कही थी. मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद फोन भी किया था. हम तो उनके गिरफ्तारी देने का इंतजार कर रहे थे लेकिन वह गए ही नहीं. वह पुलिस के नाम से बहुत डरते हैं. पार्टी में सम्मान न देने की बात भी गलत है, क्योंकि पार्टी ने एक भैंस चराने वाले को राज्यसभा का सांसद बना दिया, इससे ज्यादा क्या सम्मान पार्टी देगी. उन्हें दो बार विधानसभा चुनाव लड़ाया लेकिन जीत नहीं सके, इससे साफ है कि उनमें ही कोई कमी होगी.

इन लोगों ने छोड़ी पार्टी

सपा प्रभारी बिजनौर मलखान सिंह यादव, पूर्व डिप्टी मेयर व पूर्व महानगर अध्यक्ष डा. खालिद, जिला पंचायत सदस्य राजकुमार यादव, विनोद यादव, कंचन यादव, प्रधान उमेश यादव, राजवीर यादव, सचिन, किशनलाल यादव, बेचे लाल गंगवार, राम कुमार यादव, अशोक यादव, डॉ. रविंद्र यादव, जमुना प्रसाद मौर्य, भारत यादव, राहुल कश्यप, प्रेमपाल सिंह यादव, रेनू यादव, ठा. संतोष सिंह, मोहित यादव, कमल साहू, धर्मेद्र साहू, कंचन यादव, प्रेमपाल आजाद, रविंद्र सिंह छोटू, मुनेन्द्र यादव व अन्य हैं.