क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: राज्य के पुलिस मुखिया अपने आचरण प्रमाण पत्र का पुख्ता सबूत नहीं दे पा रहे हैं. पुलिस मुख्यालय से आरटीआई के जरिए आरटीआई एक्टिविस्ट दर्श चौधरी ने डीजीपी का कैरेक्टर सर्टिफिकेट मांगा था. कहा गया था कि डीजीपी राज्य के मुखिया हैं. वे कानून व्यवस्था को संभालते हैं, लेकिन उनका कैरेक्टर कैसा है? इस संबंध में आम जनता जानना चाहती है. पर, इस बाबत दर्श चौधरी को डीजीपी के कैरेक्टर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट ने पुलिस मुख्यालय में एक आवेदन दिया था. सवाल है कि जब एक आम आदमी का कैरेक्टर छह माह ही वैलिड रहता है तो डीजीपी जब से सर्विस कर रहे हैं उनका कैरेक्टर अब तक इनवैलिड क्यों नहीं हुआ है.

क्या-क्या मांगी जानकारी

आवेदन के जरिए आरटीआई एक्टिविस्ट दर्श चौधरी ने आचरण के अतिरिक्त डीजीपी पर होने वाले पेट्रोल खर्च, आने-जाने वाले वाहनों के हिसाब समेत 15 बिंदुओं पर जानकारियां मांगी थी. मालूम हो कि डीजीपी को सरकारी सुविधा संबंधित सरकार द्वारा प्राप्त होती है. सरकारी सुख सुविधाओं के नाम पर खर्च होनेवाली धनराशियों की जानकारी दें. डीजीपी की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा, डीजीपी ने कार्यभार संभालने के बाद से देशहित व जनहित में कौन-कौन सा काम किया है.डीजीपी की शैक्षणिक योग्यता क्या है? जिस विमान या वाहन का उपयोग डीजीपी कर रहे हैं, उन्हें खरीदा गया है या उसे भाड़ा पर लिया गया है. उस वाहन में कितना तेल खर्च होता है और उसकी कीमत वर्तमान में क्या है? डीजीपी ने व्यक्तिगत कार्यो के लिए कितनी बार सरकारी वाहनों का प्रयोग किया है और उसमें लगने वाले तेल का भुगतान किसके द्वारा किया गया. वर्तमान में डीजीपी द्वारा कितनी परियोजनाओं, योजनाओं को शुरू किया गया है. उन योजनाओं पर अबतक कितनी राशि खर्च की गई है. साथ ही साथ डीजीपी कार्यालय में प्राप्त शिकायतों पर हुई कार्रवाई का ब्योरा उपलब्ध कराएं. डीजीपी पर छोटे-बड़े कुल कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं, इनकी भी जानकारी उपलब्ध कराएं.

पुलिस मुख्यालय से नहीं मिला जबाब

इस संबंध में प्रथम अपीलीय पदाधिकारी ने आरटीआई एक्टिविस्ट को कहा कि डीजीपी से संबंधित कोई भी मामला जनहित में नहीं है. यह उनका निजी मामला है. इस पर सवाल यह उठता है कि एक आम आदमी का कैरेक्टर छह माह तक ही वैलिड रहता है तो डीजीपी जब से सर्विस कर रहे हैं, उनका कैरेक्टर अब तक इनवैलिड क्यों नहीं हुआ है.