- सिटी के चंद्रकांति रमावती देवी ग‌र्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में हुई राजनी-टी
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GORAKHPUR: चुनावी मुद्दों पर चर्चा का दौर तो लगातार जारी है. मगर इन सबके बीच दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की मुहिम में सरकार को चुनने के लिए किन्हीं मुद्दों पर चर्चा करने से पहले, चंद्रकांति रमावती देवी ग‌र्ल्स पीजी कॉलेज की टीचर्स, स्टूडेंट्स ने यह माना कि पहले वह इस बात को श्योर करें कि सभी महिलाएं वोट देंगी. क्योंकि चुनाव के दौरान हमेशा ही यह होता है कि लोग इसे हॉलीडे की तरह सेलिब्रेट करते हैं और महिला अपने रूटीन में होने वाले कामों को तवज्जो देती हैं और उन्हें इस बात की फुर्सत ही नहीं मिल पाती है कि वोट डालने जा सकें. इसलिए यहां के टीचर्स और स्टूडेंट्स ने माना कि पहले खुद वोट डालेंगे और आसपास के लोगों को भी इस बात की ताकीद करेंगे कि वह भी वोट डालने जाएं और एक मजबूत और सशक्त सरकार चुनें. इसके लिए उन्होंने नारा भी दिया कि 'छुट्टी नहीं मनाएंगे, वोट डालने जाएंगे, वोट डालकर आएंगे, तभी किचन में जाएंगे'.

शिक्षा को करें बेहतर, रोजगार के दें अवसर
सीआरडीपीजी कॉलेज में लोक सभा चुनाव के मुद्दों को लेकर काफी अच्छी चर्चा हुई और खूब कड़क बातें भी हुई. सबसे पहले रेडियो सिटी की ओर से प्रोग्राम का संचालन कर रहे आरजे सारांश ने सभी को मिलेनियल्स का मतलब समझाया. इस चर्चा में सबसे ज्यादा फोकस शिक्षा, फीमेल सिक्योरिटी और महिला सुरक्षा पर रहा. जहां टीचर्स ने शिक्षा के स्तर को और बेहतर करने और इसमें सुधार लाने की वकालत की, तो वहीं स्टूडेंट्स ने हेल्दी कॉम्प्टीशन के लिए रिजर्वेशन खत्म करने की बात कही. इतना ही नहीं क्वालिटी एजुकेशन पर सभी एक राय थे. सभी ने इस बात पर भी सहमति जताई कि बेरोजगारी यहां की सबसे बड़ी समस्या है, इसको दूर करने के लिए जो भी सरकार काम करेगी, उसको ही मिलेनियल्स का वोट मिलेगा.

जनसंख्या नियंत्रण की भी हो बात
इस दौरान यह बात भी सामने आई कि एजुकेशन हर जगह पहुंचनी चाहिए, चाहे वह गांव हो या शहर. इसके लिए सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए. बेरोजगारी के लिए जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण की जरूरत है. हम दो हमारे दो के बजाए हमारा एक का कॉन्सेप्ट अपनाया जाए. शिक्षा का व्यवसायीकरण बंद हो. बेरोजगारी की समस्या देश के विकास में बाधा है. महिलाओं की सुरक्षा के साथ ही महिलाओं के रोजगार की बात करें, कॉम्प्टीटिव एग्जाम से आरक्षण हटा दिया जाए. महंगाई कम हो. लड़के और लड़की में समानता की बात की जाए, क्योंकि अभी यह किताबी बात है और कोई इसे सीरियस नहीं लेता है. नोट बंदी या ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे लोगों को मुसीबत हो.

कड़क मुद्दा

फीमेल सिक्योरिटी का मुद्दा डिस्कशन के दौरान सबसे कड़क मुद्दा रहा. इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने कहा कि फीमेल सिक्योरिटी को लेकर तमाम कवायद हो रही हैं. 1090, 100 जैसे सिक्योरिटी के लिए नंबर भी दिए जा रहे हैं, लेकिन जब इन नंबर्स पर कॉल की जाती है तो फोन ही नहीं उठता है. इमरजेंसी के दौरान फीमेल सिक्योर नहीं हो पाती हैं, फिर भला वह कैसे सुरक्षित समाज में सांस लेने की सोच सकती हैं. उन्होंने कहा कि जो सरकार विमेंस सिक्योरिटी के साथ ही उच्च शिक्षा की व्यवस्था और उन्हें इस काबिल बनाए कि वह विपरीत परिस्थिति में अपना काम कर सकें, उन्हें ही चुना जाएगा.

मेरी बात

महिला सशक्तिकरण का नारा दिया जाता है. रोजगारपरक शिक्षा भी दी जा रही है. लेकिन जब कॉम्प्टीटिव एग्जाम होते हैं, तो उनका रिजल्ट आते-आते इतनी देर हो जाती है कि इससे एज लिमिट क्रॉस हो जाती है. कई फैमिलीज शादी के बाद बहुओं को पढ़ाई के लिए अलाऊ नहीं करती हैं, जिससे कि उनका सपना टूट जाता है. हम ऐसी सरकार चुनेंगे, जो टाइमली एग्जाम कराने के साथ ही टाइमली रिजल्ट निकालने की बात करें और युवाओं को रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर भी दे.

अर्जुमंद फातमा

सतमोला खाओ, कुछ भी पचाओ

एजुकेशन सिस्टम में भ्रष्टाचार भर गया है. वैकेंसी आती नहीं कि जॉब दिलाने वाले ठेकेदार पहले से एक्टिव हो जाते हैं. यह बगैर अंदर के व्यक्ति के पॉसिबल नहीं है. इसलिए सरकार ऐसी चुनी जाए जो भ्रष्टाचारियों पर नकेल कस सके. वहीं आजकल मान्यता में भी खूब भ्रष्टाचार हो गया है. मानक पूरा होता नहीं है और मान्यता मिल जाती है. इसकी वजह से एजुकेशन क्वालिटी भी प्रभावित हो रही है. सरकार वही अच्छी है जो मान्यता देने से पहले सही मायने में रिसर्च करें, कि वहां टीचर्स और दूसरी व्यवस्था है कि नहीं, अगर स्कूल सही है, तभी उसे मान्यता दी जाए.

कोट्स

मजबूत सरकार बने, जो राष्ट्र के विकास में कठोर निर्णय ले सके. नेशनल सिक्योरिटी से कोई कॉम्प्प्रोमाइज नहीं होना चाहिए.

ब्रिजेंद्र त्रिपाठी

कमेटी में जो भ्रष्ट लोग आते हैं, वह लोग सबकुछ खराब करते हैं. एक वैकेंसी पूरा होने में पांच साल, दस साल लग जाते हैं. करप्ट लोग पकड़े भी जाते हैं, लेकिन उन पर कोई एक्शन नहीं होता है.

सुमन लता यादव

जितनी भी वैकेंसी निकल रही है, उसका एग्जाम हो रहा है, लेकिन रिजल्ट नहीं आ रहा है. वैकेंसी आती नहीं कि जॉब दिलाने वाले ठेकेदार पहले से एक्टिव हो जाते हैं. इस तरह के भ्रष्टाचारियों पर नकेल कस सके, हम ऐसी सरकार चुनेंगे.

श्वेता सिंह

महिलाओं के लिए जो भी कानून बने हैं, उन्हें और सख्त करने और उसे अनुपालन कराने में सख्ती बरतने की जरूरत है. यह सिर्फ चुनावी मुद्दा न रहे, बल्कि इस पर अमल भी किया जाए.

सविता त्रिपाठी

युवाओं को रोजागार मिले, एजुकेशन से डोनेशन की व्यवस्था खत्म, हेल्दी कॉम्प्टीशन हो, ऐसी सरकार होनी चाहिए. इससे लोगों को फायदा भी मिले.

डॉ. इतेंद्र

राष्ट्रीय सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, इस तरह के मुद्दों को इग्नोर करने वाली सरकार न हो. हर आम आदमी खुद को सिक्योर करने के लिए ही अपनी सरकार चुनता है.

डॉ. वीरेंद्र गुप्ता

शिक्षा के स्तर में सुधार हो. विकास के मुद्दे को ध्यान में रख युवा वर्ग के लिए रोजगार, अच्छा पैकेज की व्यवस्था हो, ऐसी सरकार चुनेंगे.

डॉ. रेखा रानी

विकास के मुद्दे को ध्यान में रखकर काम करें. युवाओं को बाहर न जाना पड़े और उन्हें अपने जिले में ही रोजगार के अवसर मिल सकें.

डॉ. रेखा श्रीवास्तव

महिलाओं को सशक्त करना है तो इसके लिए सही सरकार का चुनाव करना होगा. इसके लिए पहले जरूरी है कि वोट डाला जाए. इसलिए सभी महिलाओं से अनुरोध है कि वह सुबह उठने के बाद पहले वोट डालने जरूर जाएं और इसके बाद ही किचन में जाएं.

शालिनी श्रीवास्तव