-50 हजार के ईनामी बदमाश को ढूंढ़ रही थी कानपुर, लखनऊ और बनारस की पुलिस

-कानपुर में चर्चित शानू ओलंगा समेत आधा दर्जन से ज्यादा हत्याओं में शामिल था रईस

-बनारस के जिला जेल से बरेली ले जाते वक्त रास्ते में पुल से कूदकर भाग निकला था

जरायम की दुनिया में कुख्यात 50 हजार इनामी रईस बनारसी की हत्या ने अपराध जगत में हलचल मचा दी है. रंगदारी, लूट और हत्या जैसे जघन्य अपराध के लिए चर्चित रईस बनारसी को सूबे की पुलिस पिछले चार साल से ढूंढ़ रही थी. 24 अक्टूबर 2015 को बनारस जिला जेल से बरेली जिला जेल में शिफ्ट करने के दौरान रास्ते में रईस पुलिस वैन से कूदकर फरार हो गया था. तब से फरार रईस ने पूर्वाचल में ताबड़तोड़ कई वारदातों को अंजाम देता रहा. मगर फिर पुलिस उसे जिंदा नहीं पकड़ सकी. पुलिस के हाथ भी लगा तो मुर्दा.

ओलंगा हत्याकांड से सुर्खियों में आया था

कानपुर में 29 नवंबर 2011 को डीआईजी ऑफिस के पास दिनदहाड़े राजकुमार बिंद उर्फ मामा के साथ अपने दुश्मन और डी-2 गैंग के संचालक शानू ओलंगा को रईस ने गोलियों से भून दिया था. इसके बाद वो बनारस आया और एक दूसरे मामले में आदमपुर पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. तब से रईस जेल में ही बंद था. तत्कालीन डीजीपी ने सूबे की जेलों में बंद कई शातिरों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करने का आदेश दिया था. इसी आदेश के बाद बनारस की जिला जेल से रईस को एक दरोगा और चार सिपाही लेकर बरेली के लिए निकले थे. शाहजहांपुर में एक पुल पर टॉयलेट करने के बहाने रईस ने गाड़ी रुकवाया और कूदकर भाग निकला था.

सफेदपोशों के संरक्षण में था

कानपुर के अनवरगंज के हीरामन का पुरवा से जरायम की दुनिया में पैर रखने वाले रईस सिद्दीकी उर्फ रईस बनारसी को सूबे के टॉप अपराधियों में में जाना जाता था. भाई की हत्या के बाद बनारस में दशाश्वमेघ घाट स्थित खालिसपुरा मकान नम्बर- डी 33/191 स्थित अपने ननिहाल में इसने पनाह ली. इस दौरान इसने बनारस के राकेश अग्रहरि, राजकुमार उर्फ गुड्डू मामा, बच्चा यादव, अवधेश सिंह ,बाले पटेल, पंकज उर्फ नाटे और कटेसर (रामनगर) के जावेद खां और चंदौली के लौंदा गांव निवासी आबिद सिद्धीकी को मिलाकर एक गैंग बना लिया. सोर्सेज की मानें तो इसको एक पूर्व विधायक ने भी संरक्षण दे रखा था. जिसके कारण पुलिस भी इसकी गिरेबान तक पहुंचने से कतराती थी. नया बना यह गैंग शहर कानपुर में तेजी से उभर रहे डी टू गैंग के समानांतर बनारस में भी ऐसे ही नये गैंग को बनाने में जुटा था.

मुन्ना बजरंगी ने सिखाया था अपराध का ककहरा

बनारस में रहने के कारण अपराध जगत के लोगों ने रईस का नाम रईस बनारसी रख दिया. गैंग चलाने के लिए उसने लूट व हत्या के साथ मुंगेर (बिहार) से विदेशी असलहों की तस्करी शुरू कर दी थी. बिहार से यह असलहे रुई, कबाड़ और भूसें के ट्रकों में छिपाकर प्रदेश में लाये जाते. क्राइम ब्रांच सोर्सेज की मानें तो रईस की गिनती उन खूंखार बदमाशों में होती है जो लूट, रंगदारी के लिए जान लेने से नहीं हिचकते. कानपुर में भाई नौशाद के हत्यारे शानू ओलंगा से बदला लेने की कसम खाने वाले रईस सिद्दीकी ने जब क्राइम व‌र्ल्ड में कदम रखा तो उसे कुछ लोगों का ही सपोर्ट था लेकिन उसने मुन्ना बजंरगी से सम्पर्क किया था और पहले उसके साथ काम शुरू किया. कुछ ही वक्त बाद अपना गैंग बनाकर उसने भाई की हत्या का बदला लिया. रईस बनारसी ने मोनू पहाड़ी और राजकुमार बिंद उर्फ मामा के साथ मिलकर भाई के हत्यारे शानू ओलंगा की हत्या कर दी थी. इसमें मोनू पहाड़ी के साथ देने के पीछे उसका टायसन से बदला लेना था. क्योंकि टायसन की मुखबिरी के चलते मोनू पहाड़ी के भी भाई की हत्या हुई थी.

पुलिस की वर्दी में करता था वारदात

रईस बनारसी इतना शातिर था कि वह तस्करी व लूट करने में पुलिस की वर्दी पहनता था. ताकि आसानी से भाग सके. इसका खुलासा 2007 में बनारस मलदहिया एरिया में पेट्रोल पंप संचालक लहिड़ी की हत्या के बाद हुआ था. इस हत्याकांड के वक्त बनारसी ने साढ़े तीन लाख रुपये भी लूटे थे. जब पुलिस ने इसे गिरफ्तार किया था तब इसके पास से वर्दी मिली थी.

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने किया था खुलासा

2011 में कानपुर में हुए चर्चित शानू ओलंगा मर्डर के बाद दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने राजकुमार उर्फ मामा और रईस के मौके पर पिस्टल के साथ मौजूद पिक्चर को पब्लिश की थी. ये एक्सक्लूसिव फोटो पब्लिश होने के बाद बनारस खुफिया तंत्र और पुलिस ने इन दोनों बदमाशों की खोजबीन शुरू कर दी थी. रईस की गिरफ्तारी की खबर तो पुलिस को लग गई थी लेकिन राजकुमार उर्फ मामा का पता कानपुर पुलिस नहीं लगा सकी थी. उस वक्त भी दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने एक न्यूज ब्रेक की थी. जिसमें हत्यारे की शिनाख्त मामा के रूप में करते हुए उसे बनारस के कैंट इलाके का मामा बिंद बताया था.

इन बड़ी वारदातों में था शामिल

रईस पर बनारस और कानपुर में एक दर्जन से ज्यादा मुकदमें दर्ज थे. इनमे कोतवाली, सिगरा, भेलूपुर, जैतपुरा, आदमपुर कोतवाली में हत्या, लूट, हत्या के प्रयास के मुकदमे मुख्य हैं.

कुछ बड़े मामले

- हथुआ मार्केट में पेट्रोल पंप मालिक लहिड़ी की हत्या कर 3.50 लाख की लूट

- शेख सलीम फाटक (चेतगंज) में लोहता के व्यापारी को गोली मारकर लूट

- रामकटोरा के पास व्यापारी को गोली मार कर लूट का प्रयास

- लक्सा के पास व्यापारी को गोली मारकर दो लाख की लूट

- मुखबिरी के शक में दशाश्वमेघ क्षेत्र में साथी दीपू वर्मा की हत्या

- रेवड़ी तालाब के पास साड़ी कारोबारी संग दो लाख की लूट

- वरुणापुल स्थित असलहा दुकान संचालक भाजयुमो नेता विवेक सिंह को गोली मारी