- लंबी बहस के बाद राहुल गांधी का पर्चा वैध करार दिया गया
- दोहरी नागरिकता को लेकर आपत्ति के बाद फंस गया था पेंच

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: अमेठी से उम्मीदवार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नामांकन वैध करार दिए जाने के फैसले से पार्टी नेताओं ने राहत की सांस ली है। बीते तीन दिन से राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता, शैक्षिक योग्यता और आय को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जताई गयी आपत्तियों पर सोमवार को फैसला सुनाया गया जिसमें राहुल गांधी के नामांकन को वैध करार दिया गया। डीएम कोर्ट में दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुनने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी डॉक्टर राम मनोहर मिश्र ने उनका नामांकन पत्र स्वीकार कर लिया। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि नागरिकता को लेकर फैसला लेना उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है।

स्टैंप पर भी थी आपत्ति

दरअसल राहुल गांधी द्वारा अमेठी से नामांकन किए जाने के बाद चार लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी। इसमें राहुल गांधी द्वारा दिल्ली से खरीदे गये स्टैंप का मामला भी शामिल था हालांकि रिटर्निंग ऑफीसर ने माना कि यह स्टैंप हर जगह के लिए वैध है। वहीं शैक्षिक योग्यता के कॉलम को भी भरा हुआ पाया जाने पर उसे सही माना गया है। इसी तरह आय एवं संपत्ति का विवरण भी संबंधित कॉलम में दिया गया था। अभ्यर्थी धु्रवलाल ने राहुल गांधी की विदेशी नागरिकता एवं विदेश में दूसरे नाम से जाने जाने का आरोप भी लगाया था हालांकि वे उनकी नागरिकता के निरस्तीकरण के संबंध में कोई अहम साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। वहीं रिटर्निंग ऑफीसर ने नागरिकता को लेकर कोई फैसला करने को अपने क्षेत्राधिकार से परे बताया। रिटर्निंग ऑफीसर ने चुनाव आयोग द्वारा जारी हैंड बुक के आधार पर निर्णय दिया कि यदि नामांकन में कोई त्रुटिपूर्ण अथवा मिथ्या सूचना देता है तो उसका नामांकन इस आधार पर अस्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए।  
Lok sabha Elections 2019 3rd Phase Live Update: रामपुर, बरेली और मैनपुरी में वोटिंग, 90 साल के रोशन लाल भी करने पहुंचे मतदान
'निरहुआ' ने जमा किए दस्तावेज
इसी तरह आजमगढ़ से भाजपा प्रत्याशी दिनेश कुमार यादव 'निरहुआ' के नामांकन पत्र में भी उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे का जिक्र न किए जाने के आधार पर उसे निरस्त करने की मांग की गयी। महाराष्ट्र के पालघर निवासी शशिकांत सिंह ने डीएम आजमगढ़ को दिए प्रार्थना पत्र में 'निरहुआ' के खिलाफ पुलिंज पुलिस थाने में एक वर्ष पूर्व दर्ज मुकदमे का जिक्र छिपाने का आरोप लगाते हुए नामांकन रद करने की मांग की है।