-रक्षा संपदा ने रेलवे को दिया 25 हजार स्क्वायर मीटर जमीन

- प्लेटफॉर्म नंबर नौ तक कार ले जाने की तैयारी में रेल एडमिनिस्ट्रेशन

- मॉडर्न बुकिंग काउंटर, महिला व पुरुष के लिए एसी वेटिंग हॉल

कैंट स्टेशन का सेकेंड एंट्री नई दिल्ली के कश्मीरी गेट सरीखा होगा. इसके लिए जमीन की बाधा दूर हो गई है. करीब 25 हजार स्क्वायर मीटर रक्षा संपदा की जमीन रेलवे प्रशासन को हैंडओवर कर दी गई है. अब कैंटोनमेंट एरिया की ओर भी स्टेशन को मॉडल स्वरूप दिया जाएगा. इसके तहत प्लेटफॉर्म नंबर नौ तक कार ले जाने की तैयारी रेल एडमिनिस्ट्रेशन कर रहा है. यही नहीं सेकेंड एंट्री की ओर आधुनिक बुकिंग काउंटर, महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग वातानुकूलित वेटिंग हॉल, बजट होटल, गुड्स ट्रेन के लिए अलग ट्रैक होगा ताकि सवारी गाडि़यां प्रभावित न हों. ब्लूप्रिंट बनाने का कार्य अंतिम दौर में है.

250 करोड़ से डेवलपमेंट

कैंट स्टेशन को विश्व स्तरीय मानक पर मॉडल स्टेशन बनाने के लिए 250 करोड़ की योजना बनी है. इसी में कैंट स्टेशन के सेकेंड एंट्री के विस्तारीकरण योजना को भी शामिल किया गया था लेकिन रक्षा संपदा की जमीन होने से निर्माण बाधित था. हाल ही में रेलवे ऑफिसर्स के साथ रक्षा संपदा के अफसरों की वार्ता हुई थी जिसमें रक्षा संपदा की 25 हजार स्क्वायर मीटर की जमीन रेल प्रशासन को सौंप दी है.

बनने लगे दो नये प्लेटफॉर्म

पूर्व में बनी योजना के तहत कैंटोनमेंट एरिया का विस्तार करते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 10 व 11 का निर्माण करना था, लेकिन जमीन की जटिलता के कारण योजना में बदलाव करते हुए नए प्लेटफॉर्म 10 व 11 को मालगोदाम स्थानान्तरित कर दिया गया. इस पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसके तहत कार्य भी शुरू हो चुका है. इसके बाद रेल प्रशासन अब नौ नंबर प्लेटफॉर्म तक कार ले जाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए खरबूजा शहीद से गुजरे पुराने जीटी रोड का इस्तेमाल किया जाएगा.

20 करोड़ से री-मॉडलिंग

कैंट स्टेशन की री-मॉडलिंग पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. इसके तहत प्लेटफॉर्म नंबर एक को एयरपोर्ट की तरह बनाया जा रहा है. फाल्स सीलिंग लगाने के साथ आधुनिक एप्रेन बन चुका है. पुराने फुट ओवरब्रिज पर एस्केलेटर लग रहा है. नए वेटिंग हॉल के पास से नौ नंबर तक फुट ओवरब्रिज बनाया जा रहा है. नए भवन बन रहे हैं तो पुराने का जीर्णोद्धार किया जा रहा है. 13 किलोमीटर तक लकड़ी के जर्जर स्लीपर बदले जा रहे हैं.