नर्इ दिल्ली (आर्इएएनएस )। ऑपरेटिंग रेश्यो से राजस्व की तुलना में खर्चों की गणना होती है। रेलवे का अप्रैल-जुलाई में रिकॉर्ड ऑपरेटिंग रेश्यो 111.51 फीसदी  है। यह रेश्यो बीते सालों से ऊपर है। इसमें बढ़ती पेंशन की देनदारी और ऑपरेशनल खर्चे शामिल हैं।

फाइनेंस विंग आकंड़ों से जानें रेलवे का हाल
रेलवे के फाइनेंस विंग के आकंड़ों से रेलवे की वित्तीय वर्ष 2018-19 के पहले चार महीनों में कमाई तय लक्ष्य से कम  है।अप्रैल-जुलाई में यात्री किराए से 17,736.09 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य था लेकिन वह 17,273.37 करोड़ रुपये की कमाई ही कर सकी है।  

निर्धारित कमार्इ के लक्ष्य तक नहीं पहुंची
अप्रैल-जुलाई में रेलवे की सामान ढुलाई से होने वाली कमार्इ भी इसके निर्धारित किए गए लक्ष्य से कम रही। रेलवे ने चार महीनों में सामान ढुलार्इ से 39,253.41 करोड़ रुपये कमाने का टारगेट सेट किया था लेकिन इसके जरिए 36,480.41 करोड़ रुपये ही कमा सकी है।

अप्रैल-जुलाई में कमार्इ से ज्यादा हुआ खर्च
वहीं भारतीय रेलवे की चालू वित्तीय वर्ष में कमाई का लक्ष्य 61,902.51 करोड़ रुपये रखा गया था लेकिन इसकी कुल कमार्इ 56,717.84 करोड़ रुपये रही है। रेलवे को चलाने के लिए  52,517.71 करोड़ रुपये खर्च हुआ, जब कि कमार्इ 50,487.36 करोड़ की ही हुर्इ है।

आॅपरेटिंग रेश्यो के हार्इ होने की वजह बतार्इ
इस संबंध में रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आर्इएएनएस आॅपरेटिंग रेश्यो के हार्इ होने की वजह बतार्इ हैं। अधिकारी के मुताबिक रेलवे की पेंशन देयता, रेलवे बोर्ड का खर्च और रेलवे संस्थानों पर होने वाला खर्च के चलते उसका ऑपरेटिंग रेश्यो 111.51 पर पहुंच गया है।

ट्रैफिक के हिसाब से सीजन ज्यादा अच्छा नहीं  
7वें वेतन आयोग के बाद से रेलवे को 47,000 करोड़ रुपये की पेंशन देनी पड़ रही है। अप्रैल-जुलाई के दौरान रेलवे ने करीब 12,000 करोड़ रुपये पेंशन के रूप में खर्च किए हैं। इसके साथ ही कहा कि यह सीजन भी रेलवे के ट्रैफिक के हिसाब से ज्यादा अच्छा नहीं रहता है।

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