- रोड पर ही एक्स्पायर हो जा रहा है ई-वे बिल

- लोडेड ट्रक हाईवे से शहर में आने में लग रहा तीन से चार दिन का समय

- गुजरात-महाराष्ट्र के ट्रक मालिकों ने इलाहाबाद के लिए ट्रक भेजने से किया इनकार

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ALLAHABAD:

केस- 1

शहर के किराना व्यापारी पीयूष अग्रवाल ने एमपी से एक ट्रक सुपाड़ी मंगाया था. सुपाड़ी लदा ट्रक संडे की रात में कौडि़हार पहुंच गया था. लेकिन ट्रक को कौडि़हार से शहर के अंदर व्यापारी के गोदाम तक पहुंचने में तीन दिन का समय लग गया. ट्रक बुधवार की देर रात में व्यापारी के गोदाम तक पहुंचा.

केस-2

एफएमसीजी व्यापारी अजय गुप्ता के पास पारले के साथ ही अन्य कंपनियों का एजेंसी है. लेकिन इनके एजेंसी तक माल नहीं आ पा रहा है. ट्रक दो-तीन दिन से हंडिया हाईवे पर ही फंसा हुआ है. ट्रक शहर के अंदर नहीं आ पा रहा है. जिसकी वजह से छोटा-हाथी भेज कर उन्हें अपना माल मंगाना पड़ रहा है.

शहर में इन दिनों पूरा सिस्टम बेहाल हो चुका है. यूं कहें कि पूरा शहर अब न चलने लायक रह गया है और न ही व्यापारियों के लिए व्यापार करने लायक. शहर में जाम की समस्या न हो इसलिए कॉमर्शियल वाहनों व ट्रकों का डायवर्जन किया गया है. शहर में ट्रकों की इंट्री बंद कर दी गई है. वहीं हाईवे पर लगने वाले जाम के कारण ट्रकें ट्रांसपोर्ट नगर तक नहीं पहुंच पा रही हैं. शहर के बाहर इंट्री प्वाइंट पर ही ट्रकें दो से तीन दिन तक खड़ी रह जा रही हैं. जिसकी वजह से व्यापारियों का ई-वे बिल एक्सपायर हो जा रहा है.

पूरा शहर जाम की समस्या से घिर गया है. वहीं एडमिनिस्ट्रेशन के साथ ही, पुलिस और ट्रैफिक डिपार्टमेंट समस्या का कोई समाधान नहीं कर पा रहा है. स्थिति ये है कि शहर के अंदर व बाहर जहां छोटे-बड़े गाडि़यों का लंबा जाम लग रहा है. वहीं हाईवे पर ट्रकों का रेला लगा हुआ है. शहर में जाम न लगे, कोई दुर्घटना न हो, इसके लिए ट्रकों की इंट्री बंद करना जरूरी है. लेकिन व्यापारियों का माल उनके गोदाम तक पहुंचता रहे, शहर में आता रहे, व्यापार चलता रहे, इसकी व्यवस्था करने की भी जिम्मेदारी भी तो एडमिनिस्ट्रेशन की ही है.

ई-वे बिल एक्सपायर होने पर कहीं कार्रवाई न हो जाए..

दिल्ली, मुंबई, कानपुर, लखनऊ, गुजरात, एमपी के साथ ही अन्य राज्यों से आने वाले ट्रकों को शहर के अंदर आने में जहां दो से तीन दिन का समय लग रहा है. वहीं ई-वे बिल भी एक्सपायर हो जा रहा है. जिसकी वजह से व्यापारी परेशान हैं कि कहीं व्यापारियों का माल रास्ते में पकड़ न लिया जाए.

डिपार्टमेंट के अधिकारियों को ये पता है कि कार्रवाई कब करनी चाहिए और कब नहीं. जेनविन कारण से अगर ई-वे बिल एक्सपायर होता है, तो किसी भी व्यापारी का हरेशमेंट नहीं किया जाएगा. अगर लेट-लतीफी से ट्रक नहीं आ पा रही है, तो समय से इसकी जानकारी दी जा सकती है.

रामप्रसाद

एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2

शहर को जाम से निजात दिलाने के साथ ही व्यापारियों को व्यापार करने की सुविधा देना भी एडमिनिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी है. जिम्मेदार अधिकारी ये बताएं कि माल नहीं आएगा तो फिर व्यापार कैसे होगा. वहीं ई-वे बिल एक्सपायर होने पर व्यापारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

संतोष पनामा

संयोजक

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति