सालभर में जर्जर हुए रेलवे के अंडर पास रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट

नियमित रखरखाव न होने से रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट हो गए जर्जर

Meerut. जल बचाओ कल बचाओ की मुहिम में रेलवे अपनी कई योजनाओं के साथ सहयोग कर रहा है. योजनाएं बेहतरीन पर उन पर भी लापरवाही और अनदेखी हावी हो चुकी है. इसका नतीजा है कि गत वर्ष मेरठ रीजन में बने रेलवे के अंडर पास में लगाए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट सालभर में ही जर्जर हो गए. बरसात में अंडर पास में भरा पानी भरपूर गंदगी के साथ इन प्लांट के टैंकरों में जा रहा है.

मेरठ हापुड़ लाइन पर लगे प्लांट

दरअसल, रेलवे ने मानव रहित क्रांसिग पर रेल लाइन के नीचे से रास्ता निकालते हुए अपनी अंडर पास योजना के तहत गत वर्ष मेरठ हापुड़ ट्रैक पर अंडर पास बनाए थे. इन अंडर पास की खासियत थी कि बरसात के दिनों में इनमें भरने वाले पानी को निकालने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाया गया था, ताकि पानी अंडर पास से सीधा टैंक में एकत्र हो और जल संरक्षण किया जा सके. इस योजना के तहत मेरठ हापुड़ ट्रैक पर नूरनगर और बजौत गांव की रेल लाइन के नीचे अंडर पास बनाया गया था.

कूडे़ और पत्थरों से अटा प्लांट

इन दोनों अंडर पास प्लांट को सालभर पहले चालू कर दिया गया लेकिन रखरखाव के अभाव में सालभर बाद भी अभी अंडर पास का ड्रैनेज सिस्टम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पूरी तरह काम नही कर रहा है. तेज बारिश में अंडर पास में पानी भरने की संभावना को देखते हुए रेलवे ने अंडर पास के मोड़ पर टैंकर लगाकर पूरा सिस्टम लगाया था, लेकिन गंदगी और नियमित सफाई ना हो पाने के कारण रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नालियां पूरी तरह जाम हो चुकी हैं. वाटर टैंकर से लेकर नालियों में ईट पत्थर अटे हुए हैं जिस कारण से बरसात का पानी गंदगी के साथ टैंकर में एकत्र हो रहा है.

दोनों अंडर पास हापुड़ रीजन के अंडर में आता है मुरादाबाद मुख्यालय द्वारा यह तैयार कराए गए थे. वहीं के कर्मचारियों द्वारा इनकी रखरखाव की जिम्मेदारी है.

- आरपी शर्मा, स्टेशन अधीक्षक