-बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में पंडित उमाशंकर ने कथा सुनाई रामकथा

बरेली:

बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर में आयोजित श्री रामचरितमानस कथा के नौवें दिन कथा व्यास ने माता सीता की कथा सुनाई। कथा सुनाते कथा व्यास पंडित उमाशंकर ने कहा कि माता सीता की खोज में एक महीने की यात्रा के बाद बंदर वन में मार्ग भटक गए। हनुमान जी बंदरों को भूखा प्यासा जानकर उनके भोजन की व्यवस्था में एक पर्वत पर चल जाते हैं। वहां से उन्हें एक गुफा दिखाई देती है, जिसमें जलीय पक्षी बगुला चकवा तथा हंस अंदर जा रहे हैं। हनुमान जी कहते हैं कि इस गुफा में जल के पक्षी जा रहे हैं। इसका अभिप्राय है की गुफा में जल अवश्य है।

प्रकाश से जगमग थी गुफा

गुफा के भीतर बंदरों को दिखाई पड़ा कि सूर्य का प्रकाश तो भीतर नहीं जा सकता था। सैकड़ों सूर्य के प्रकाश के सामान गुफा जगमग आ रही थी। यह प्रकाश था देवी स्वयं प्रभा का जो वहां बैठकर तपस्या कर रही थी।

विश्वास से पूरे होते काम

कथा व्यास बताते हैं कि स्वयं प्रभा ने बंदरों से कहा की आंख बंद कर लो और आप लोगों को माता सीता जी प्राप्त हो जाएंगी। इसका भावार्थ बताते हुए कहते हैं कि अभी तक बंदरों ने पुरुषार्थ से कार्य सिद्ध करने का प्रयास किया परंतु अब विश्वास करके खोजने का प्रयास कीजिए। किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए जहां कर्म की आवश्यकता होती है। जब तक हृदय से विश्वास ना किया जाए तब तक वह कार्य पूर्ण नहीं हो सकता है। कथा के दौरान प्रताप चंद्र सेठ, हरिओम अग्रवाल और संजीव औतार अग्रवाल आदि मौजूद रहे।